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शामली चीनी मिल की दस हजार क्विंटल गन्ने की पेराई क्षमता बढ़ेगी

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शामली। इस बार शामली चीनी मिल दस हजार क्विंटल गन्ने की पेराई क्षमता बढ़ाएगा। गन्ना गोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक ने ट्रेंच विधि से गन्ना बुआई की विधियों का विस्तार से जानकारी दी।
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बुधवार को अपर दोआब चीनी मिल की ओर से अपर दोआब चीनी मिल में गन्ना गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक ने बताया कि गन्ने की फसल में नमी की आवश्यकता है, अत्यधिक जलभराव की आवश्यकता नहीं है। गन्ने के खेत में नमी दो से तीन इंच रह जाए, उस दशा में गन्ने की फसल की सिंचाई करनी चाहिए। उन्होंने गन्ने की फसल में लगने वाली मुख्य बीमारी ग्रासी सूट, एक फाइटोटलाजमा से फैलने वाली बीमारी से अवगत कराया। इस बीमारी क्लंप में छोटे-छोटे गन्ना बनता है। गन्ने का क्लंप झाड़ीनुमा हो जाता है। गन्ने की पत्तियां हलके पीले रंग व दूधिया सफेद रंग की होती है। इस बीमारी से रोकथाम के लिए स्वस्थ व रोग रहित खेत से बीज का चुनाव करे। गन्ने के बीज को नम-गर्म वायु संयंत्र में 52 डिग्री सेल्सियस पर चार घंटे के लिए उपचारित करके बीज की बुआई करे।
कृषि वैज्ञानिक ने गोप पर काले रंग का कीड़ा लगने व उसके लक्षण, उपचार की जानकारी दी। उन्होंने पोका बोइंग बीमारी रोकथाम के सुझाव दिए। गोष्ठी में जिला गन्ना अधिकारी डॉ. अनिल भारती ने शासन की गन्ने की नई सट्टा नीति और बेसिक कोटा के बारे में अवगत कराया। बिना आधार कार्ड के गन्ना सट्टा नही चलेगा। इस बार दशहरा से चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू हो जाएगा। अपर दोआब चीनी मिल के सीईओ आरबी खोखर ने बताया कि शामली चीनी दस हजार क्विंटल की पेराई क्षमता बढ़ा रहा है। जिससे किसानों की समय पर गन्ने की आपूर्ति में परेेशानी से छुटकारा मिलेगा। मौके पर ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक उपेंद्र कुमार, शामली गन्ना सहकारी समिति के सचिव मुकेश कुमार राठी, शामली मिल के गन्ना महाप्रबंधक कुलदीप पिलानियां, अतिरिक्त गन्ना महाप्रबंधक नरेश कुमार, उपगन्ना महाप्रबंधक केपीएस सिरोहा, वरिष्ठ गन्ना प्रबंधक दीपक कुमार मौजूद रहे।
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