साहित्यिक संस्था चेतना की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें दिल्ली से पधारे गीतकार संदीप सजर ने सुनाया, तेरी नजरों का ख्वाब ले जाऊं, इस कदर लाजवाब हो जाऊं, तुझको रख लूं छुपाकर दुनिया से, तेरे रुख का नकाब हो जाऊं।
रविवार शाम को नगर पालिका परिषद शामली के सभागार में साहित्यिक संस्था चेतना की ओर से आयोजित काव्य संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि गीतकार संदीप सजर ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। सबसे पहले रेखा वर्मा ने मां सरस्वती की वंदना की। हास्य कवि अनिल पोपट ने कहा, नेताजी बोले यूं झंडों को गाड़ के, किसने पिया मां का दूध, जो हमको पछाड़ दे, राजनीति में पलक झपकते ही पलटता पासा, चमचे ही ले गए झंडे उखाड़ के। डॉक्टर अनुराग शर्मा ने कहा, कृष्ण के देश में ये कैसा अत्याचार, माता कह तुम मुझे बुलाते कटती बीच बाजार। हास्य कवि सुनील अरोरा ने सुनाया, दस साल से जब मैने करवा चौथ व्रत नहीं रखा, ऊपर वाले ने तुझे क्यू स्वस्थ रखा। वीर रस के कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने सुनाया, गुरुओं की इज्जत से होता है देश महान, करने दो मुझको इस भारत का नव निर्माण।
दिल्ली से आए गीतकार संदीप सजर ने पढ़ा, ये जो दिल में ख्याल आते हैं, एक इशारे से कत्ल करते हो, तुमको कितने कमाल आते हैं। डॉक्टर विनोद अश्क ने कहा, रास्ते मंजिलें खोज पाए, पहर अपने अंदर भटकता रहा आदमी, जिनको चाहत सुहाने सवेेेरों की थी उनकी शादी में बस शाम के फूल थे। काव्य संध्या की अध्यक्षता डॉक्टर विनोद अश्क ने की। इस मौके पर डॉक्टर मोहनलाल, अनिल रस्तोगी, कृष्ण गोपाल, रचिर गोयल, संदीप कुमार, नीरज संगल, राकेश कौशिक एडवोकेट, श्यामलाल एडवोकेट, मनोज पुंडीर एडवोकेट, सपन मित्तल, आदेश शर्मा, शैलेश मुनी, डॉक्टर राजेंद्र गोयल, डॉक्टर सुशील मित्तल, पवन कुमार मौजूद रहे। संचालन डॉक्टर विपिन कौशिक ने किया।