सियासी रुख साधने के लिए योगी ने चला हिंदुत्व कार्ड
शामली।
कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में चल रहा सियासी संग्राम अब ध्रुवीकरण की ओर चल निकला है। करीब 35 मिनट के भाषण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सियासी रुख को साधने के लिए हिंदुत्व कार्ड खेल दिया, ताकि चुनावी समीकरणों को पूरी तरह भाजपा के पक्ष में किया जा सके।
बृहस्पतिवार को जब भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह के समर्थन में शामली में जनसभा हुई, तो उसमें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण की शुरुआत तीन बार भारत माता की जय और तीन बार वंदेमातरम् बोलकर की। भाषण के दौरान उन्होंने 2013 में मुजफ्फरनगर के गांव कवाल में हुई सचिन और गौरव की हत्या का जिक्र किया और बहन बेटियों की रक्षा में उन दोनों की शहादत बताई। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने मुजफ्फरनगर के सांप्रदायिक दंगे की याद दिलाकर जाट बिरादरी के लोगों को झकझोरने का प्रयास किया कि जब दंगा हुआ था, तो भाजपा ही उनके साथ थी। इसके अलावा कैराना पलायन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में पलायन रोका गया और बदमाशों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा कांवड़ यात्रा का जिक्र कर जब मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता सबके लिए बराबर है, यदि दूसरे लोगों को उनके पर्व मनाने पर सुविधा मिल सकती हैं, तो कांवड़ यात्रा पर भी मिलेगी। इसके बाद अपने भाषण का समापन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो बार जय जय श्रीराम का जयघोष करके किया। इससे स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में हिंदुत्व कार्ड खेल दिया है। क्योंकि 2013 के सांप्रदायिक दंगे के बाद 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी सफलता प्राप्त हुई थी, तब मुजफ्फरनगर से डाक्टर संजीव बालियान, कैराना से हुकुम सिंह, सहारनपुर से राघव लखनपाल शर्मा, मेरठ से राजेंद्र अग्रवाल, गाजियाबाद से वीके सिंह और बिजनौर से भारतेंदु सिंह सांसद चुने गए थे। उत्तर प्रदेश में भाजपा के 73 सांसद जीतकर संसद पहुंचे थे। यही स्थिति 2017 के विधानसभा चुनाव में भी बनी थी। जब कैराना पलायन प्रकरण सुर्खियां बनने के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में भाजपा को अप्रत्याशित जीत के रूप में 325 विधायक बने थे। अब फिर से भाजपा को कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में हिंदुत्व के कार्ड से पूरी उम्मीदें हैं।