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जिला न्यायालय की स्थापना को वकीलों ने किया क्रमिक अनशन

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जिला न्यायालय की स्थापना के लिए क्रमिक अनशन
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शामली। जिला न्यायालय की स्थापना की मांग को लेकर शनिवार को अधिवक्ताओं ने नो वर्क रखा और रजिस्ट्री दफ्तर पर तालाबंदी करके क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। अधिवक्ताओं ने कहा कि जिला न्यायालय की स्थापना जिला मुख्यालय पर ही होनी चाहिए।
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शनिवार को जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बिजेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने नोवर्क रखते हुए शामली उपनिबंधक कार्यालय में तालाबंदी कर दी। कलक्ट्रेट परिसर में धरना प्रदर्शन करते हुए क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। क्रमिक अनशन पर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह, चंद्रभान सिंह, रामपाल सिंह, जसपाल राणा, अवधेश मलिक बैठे। इसके बाद अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम इंद्र विक्रम सिंह को सौंपा। अधिवक्ताओं ने कहा कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन से पूर्व शामली और बड़ौत तहसील थीं। इसके बाद शामली और बड़ौत तहसील को समाप्त करके कैैराना और बागपत को नई तहसील का दर्जा दिया गया। बाद में कैैराना में मुंसिफ कोर्ट न्यायालय की स्थापना हुई। वर्ष 2011 में शामली जिला बनाया गया। जिला न्यायालय भवन के लिए कई प्रस्ताव बनाकर भिजवाए गए, लेकिन अब तक जिला न्यायालय की स्थापना नहीं हुई। अधिवक्ताओं ने कहा कि उन्हें कैैराना में जिला न्यायालय स्थापना किए जाने की सूचना सूत्रों से मिल रही है, जो न्याय संगत नहीं है। क्योंकि जिला न्यायालय की स्थापना जिला मुख्यालय पर होनी चाहिए। यदि कैराना में स्थापना होती है, तो शामली और थानाभवन के वादकारियो को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष पवन तरार, कंवरपाल बनत, जयवीर कुुड़ाना और बाबूराम पंवार ने भी अधिवक्ताओं के धरनास्थल पर पहुंचकर जिला मुख्यालय पर जिला न्यायालय की स्थापना किए जाने का समर्थन किया। इस दौरान अधिवक्ता नीलम, राजेश आर्यन, संजय शर्मा, प्रदीप पंवार, जसपाल राणा, ओपी कौशिक, मुकेश गर्ग, जयपाल चौहान, रामकुमार वर्मा, सतीश चौहान, सतीश कुमार मिठालिया, रामफूल सिंह, सतेंद्र धीरयान, रविंद्र कुमार, विवेक कुमार, मनोज देशवाल, मनोज जांगिड, सौराज सिंह, नीलम पुरी, श्यामवती, दीपक कौशिक आदि अन्य अधिवक्ता भी मौजूद रहे।
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