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संविदा पर तैनात सर्जन के भरोसे महकमा, वो ही दे गए दगा

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शामली। नसबंदी कराने के लिए अस्पताल पहुंची 33 महिलाओं का लौटना कोई इत्तेफाक या नई बात नहीं है। पूर्व में भी डाक्टरों की मनमानी के चलते हंगामे होते रहे हैं। हालांकि इसी कमी के चलते एक महिला सर्जन के खिलाफ कार्रवाई शासन में पेंडिंग पड़ी हुई है। बावजूद इसके चिकित्सक सुधरने को तैयार नहीं हैं।
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शामली में स्वास्थ्य विभाग के पास अभी हाल में कोई भी सरकारी सर्जन नहीं है, जिसके चलते शामली अस्पताल में संविदा पर एक डाक्टर सौरभ अग्रवाल को लगाया गया है। इसके अलावा पूर्व सीएमओ डाक्टर मंजीत कौर ने भी सेवानिवृत्त होने के बाद संविदा पर अपनी सेवा दोबारा सरकारी अस्पताल में शुरू की थी। हालांकि समय पर अस्पताल में नहीं आना सहित अन्य कई आरोपों के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए लखनऊ लिखा गया था, लेकिन अभी यह मामला लखनऊ में पेंडिंग है। अब केवल शामली में एक ही डाक्टर सौरभ अग्रवाल हैं। झिंझाना में मंगलवार को शिविर में नसबंदी कराने पहुंची 32 महिलाएं पूरे दिन भूखी बैठी रहीं, लेकिन डाक्टरों द्वारा टीम नहीं भेजी गई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने डाक्टर को नसबंदी करने के लिए जाने के लिए कहा गया था, लेकिन वह नहीं गए। इसके अलावा शामली सरकारी अस्पताल में तैनात महिला चिकित्सक अनिता बत्रा भी नसबंदी करने में दक्ष है, इसके चलते परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल द्वारा उनको भी शिविर में जाने के लिए कहा गया गया, लेकिन वह भी नहीं गई। दोनों डाक्टरों के द्वारा परिवार नियोजन कार्यक्रम में लापरवाही बरतने के आरोप में सीएमओ डाक्टर राजकुमार द्वारा कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई, जिसमें सर्जन डाक्टर सौरभ अग्रवाल की संविदा समाप्ति की संस्तुति और महिला चिकित्सक डाक्टर अनिता बत्रा के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई।

मामला बेहद गंभीर है, महिलाएं अस्पताल में बैठी रहीं, लेकिन कहने के बाद भी डाक्टर नसबंदी करने नहीं गए, जिसके चलते उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है
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-राजकुमार
सीएमओ
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