इलाज के अभाव में भटक रहे मरीज
कैराना(शामली)। हेपेटाइटिस सी के कारण क्षेत्र के गांव अलीपर में भी लोग ग्रसित हैं। इलाज का दावा करने वाला स्वास्थ्य विभाग आज तक यहां ग्रामीणों को दवाई मुहैया नहीं करा सका। जिस कारण सक्षम लोग प्राइवेट अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं, जबकि गरीबों का बीमारी से बुरा हाल है।
जहानपुरा गांव में हेपटाइटिस सी के मामले सामने आने के बाद अमर उजाला की टीम गांव अलीपुर में पहुंची और इस बीमारी से ग्रसित लोगों का हाल जानने का प्रयास किया। गांव के मोहसिन ने बताया कि गांव में दूषित पानी के कारण आसपास के गांवों में बीमारी अपने पैर-पसार रही है। उसे भी तीन साल पहले हेपटाइटिस सी हो गया था, लेकिन उसने मेरठ में महंगा उपचार कराया। जिसके बाद उसकी बीमारी ठीक हो गई, लेकिन गांव में काफी मरीज ऐसे है। जिनके पास महंगे उपचार के लिए पैसे नहीं हैं।
गांव के तोहसीन ने बताया कि पेट में दर्द के चलते उसने एक माह पहले मेरठ जाकर एक पैथोलॉजी लैब से जांच करायी थी, इसमें हेपटारइटिस सी पॉजिटिव आया, लेकिन उपचार महंगा होने के कारण अभी उपचार शुरू नहीं कराया। तालिब ने बताया कि एक साल पहले गांव में मेरठ के एक बड़े अस्पताल के डाक्टरों ने जांच कैंप लगाया था। इसमें उसे हेपटाइटिस सी आया था। वह कैराना व शामली के डाक्टरों से दवाई लेकर अपना काम चला रहा है। अय्यूब ने बताया कि उसको हेपटाइटिस सी है, लेकिन वह गरीब है। जिस कारण उपचार नहीं करा सका। यहीं नही अरशद अली, बाबू की पत्नी खुर्शीदा, इसरयान, कुर्बान, कासिम, हारून, कौसर, नासिर प्रधान आदि दर्जनों लोगों को हेपटाइटिस सी है। इनमें से चंद ही लोग अपना इलाज करा पा रहे है, जबकि दर्जनों लोग रुपयों के अभाव में बीमारी के चलते घुट-घुट कर जी रहे है।
एक साल पहले आया संज्ञान में, नहीं मिली दवाई
गांव अलीपुर में एक साल पहले अमर उजाला ने इस बीमारी के बढ़ते मरीजों के बारे में स्वास्थ्य विभाग को चेताया था, जिस पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव अलीपुर तथा मन्नामाजरा में कैंप लगाकर ब्लड की जांच की गई थी, करीब साठ लोगों को हेपेटाइटिस सी की पुष्टि हुई थी, लेकिन उसके बाद भी आज तक इन लोगों को दवाइयां मुहैया नहीं राई गईं। सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि गांव में चिकित्सकों को भेजकर ग्रामीणों की जांच कराई जाएगी।