शामली। उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास विभाग की ओर से दुग्ध नीति 2018 के माध्यम से प्रदेश में दुग्ध उद्योग के क्षेत्र में निवेश एवं उद्योगों के विकास प्रतिस्पर्धात्मक बनाए रखने के लिए राज्य सरकार द्वारा रियायतें, वित्तीय सुविधाएं एवं अनुदान दिया जाएगा।
उप दुग्धशाला विकास अधिकारी बृज मोहन त्यागी ने बताया कि पूंजीगत निवेश अनुदान लाभार्थियों को परियोजना लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम धनराशि 50 लाख तक की सीमा तक दो किश्तों में अनुदान मान्य है। योजना के तहत प्रसंस्करण के उत्पादों का श्रेणीकरण तथा मानकीकरण कराने हेतु वास्तविक रूप से भुगतान की गई फीस एंड टेस्टिंग चार्ज के सापेक्ष 50 प्रतिशत अधिकतम 1.50 लाख अनुदान प्रतिपूर्ति शामिल है। पेटेंट डिजाइन पंजीकरण प्राविधान की इस मद योजना में पेटेंट डिजाइन के पंजीकरण हेतु दुग्ध प्रसंस्करण उद्योग को आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाना है। इस कार्य हेतु उद्योगों द्वारा भुगतान की गई फीस का 75 प्रतिशत अधिकतम 1.50 लाख अनुदान की एक बार प्रतिपूर्ति की जाएगी। बाजार विकास एवं ब्रांड प्रोत्साहन प्राविधान के तहत दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों के बाजार विकास एवं ब्रांड प्रोत्साहन उत्पाद के निर्यात को अन्य देशों में उत्पाद का नमूना सैंपल भेजने, एयरपोर्ट/समुद्रीपोर्ट तक परिवहन होने वाले व्यय तथा उत्पाद की एफओबी मूल्य हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाएगा। इस दुग्ध नीति के तहत विभिन्न प्रकार के सूचीबद्ध दुग्ध उद्योगों के लिए प्रस्ताव जिले स्तरीय कमेटी वित्तीय स्वीकृति हेतु मुख्यालय भेजेगी।