केंद्र सरकार फरवरी के प्रथम सप्ताह में आम बजट पेश करेगी। व्यापारी और उद्यमियों को आम बजट से ढेरों उम्मीदें हैं। खासकर इनकम टैक्स की सीमा बढ़ाने पर व्यापारियों का जोर है। व्यापारियों का कहना है कि इनकम टैक्स की सीमा बढ़ेगी, तो उससे आम जन को भी फायदा होगा तथा व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
डीजल और पेट्रोल की कीमतों में लगातार उछाल आने की वजह से व्यापार और उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, रोजमर्रा की जरूरत वाले उत्पादों की लागत भी बढ़ गई है। क्योंकि फैक्ट्री में उत्पादन के साथ ही माल ढुलाई का भाड़ा बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर आम उत्पादों की कीमतों पर पड़ता है। व्यापारी और उद्यमियों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी होनी चाहिए। इसके अलावा इनकम टैक्स की सीमा ढाई लाख से बढाकर चार लाख की जानी चाहिए।
व्यापारी और उद्यमियों से बातचीत
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष अंकित गोयल का कहना है कि आयकर की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर चार लाख रुपये की जानी चाहिए। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पैकेज मिलना चाहिए, ताकि उद्योग जगत को लाभ हो, उसके लिए सरकार को सोचना चाहिए।
इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन शामली चैप्टर के संरक्षक जेके जैन का कहना है कि किसानों की आमदनी बढ़ेगी, तो पैसा बाजार में आएगा। इसलिए आम बजट किसानों के हित में होना चाहिए। छोटे उद्यमी के प्रोत्साहन वाला बजट आना चाहिए, क्योंकि छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलने से उद्यमी के साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएन शामली चैप्टर के चेयरमैन वेदप्रकाश आर्य का कहना है कि जीएसटी और नोटबंदी के बाद उत्पादन में मंदी आई। आम बजट 2018 से उम्मीद है कि उद्योगों के लिए रियायतें मिलें। पूर्व में रिम-धुरा उद्योग पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं था, लेकिन जीएसटी में इस पर 18 प्रतिशत टैक्स लगा दिया। चूंकि रिम-धुरा कृषि उपयोगी वाहनों में प्रयोग होता है, लिहाजा रिम धुरा उद्योग को टैक्स मुक्त रखा जाए या फिर अधिकतम 5 प्रतिशत टैक्स के दायरे में लाया जाए।
युवा उद्यमी अनुज कुमार गर्ग का कहना है कि बजट में सबसे महत्वपूर्ण टैक्स है। नए उद्योग स्थापित करने में टैक्स की मार आड़े आती है। इनकम टैक्स बढ़ने पर परेशानी होती है। इनकम टैक्स की सीमा ढाई लाख से बढ़ाई जानी चाहिए। इसके अलावा रोजमर्रा की जरूरत के उत्पादों में डीजल और पेट्रोल के दाम कम होने चाहिए, क्योंकि इनसे दैनिक जरूरत के उत्पादों पर भी फर्क पड़ता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष घनश्यामदास गर्ग का कहना है कि आम बजट में व्यापारियों का हित होना चाहिए। क्योंकि नोटबंदी और जीएसटी के बाद व्यापारी पर टैक्स का बोझ बढ़ गया, जिससे अब तक व्यापारी परेशान हुआ। टैक्स की दरों में कमी होगी, तो व्यापारी के साथ ही आमजन को भी लाभ होगा।