हरिद्वार कांवड़ मेला के मद्देनजर रूट डायवर्जन लागू होने के कारण रोडवेज बसों में सवारियों का टोटा होने लगा है। रोडवेज बसों के फेरे घट गए हैं। कई -कई घंटे के अंतर से रोडवेज बसें वापस शामली स्टेशन पहुंच पा रही हैं, जबकि पूर्व में यह क्रम जल्दी था।
हरिद्वार कांवड़ मेला में सहारनपुर परिक्षेत्र के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, छुटमलपुर, खतौली, शामली, गंगोह शामिल हैं। गंगोह, शामली के अनुबंधित रोडवेज डिपो को छोड़कर चार रोडवेज डिपो से 400 रोडवेज बसों का संचालन हरिद्वार कांवड़ मेले में लगाया गया था। शनिवार को रूट डायवर्जन व्यवस्था लागू हो जाने से हरिद्वार में कांवड़ियों की संख्या अधिक होने से रोडवेज की बसें जाम में भी फंसने लगी हैं। एक बस को निकलने पांच से सात घंटे लग रहे हैं। वहीं, रूट डायवर्जन के बाद मेेरठ,- शामली मार्ग, शामली- मुजफ्फरनगर, शामली- पानीपत मार्ग पर रोडवेज बसो में सवारियों का टोटा हो गया है। पचास प्रतिशत सवारियां कम निकल पा रही हैं।
शामली रोडवेज बस अड्डे के अधीक्षक राजेंद्र चौहान ने बताया कि मेरठ-कंकरखेड़ा बाईपास से बसों का संचालन होने की वजह से रविवार को सवारियों की कमी रही। उधर, सहारनपुर परिक्षेत्र के आरएम मनोज पुंडीर का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान रूट डायवर्जन तथा जाम में फंसने के कारण रोडवेज बसों से होने वाली आय में भी गिरावट आ गई है। पूर्व में 54 लाख रुपये प्रतिदिन की आमदनी हो रही थी, जो अब 25 लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना है। उनका कहना है कि हरिद्वार कांवड़ मेला रोडवेज के लिए घाटे का सौदा है, लेकिन यात्रियों को बेेेेहतर सुविधा देने का उद्देश्य रहता है।