जैन संस्कृति को बचाने का आह्वान किया
शामली। दिगंबर जैन साधु सेवा समिति की ओर आयोजित धर्मसभा में जैन संत 108 सौरभ सागर जी महाराज ने कहा कि धर्म से बढ़कर कुछ नहीं है। जैन अहिंसा की बात करते हैं, लेकिन उसको अपने अंदर धारण नही कर पा रहे हैं। उन्होंने जैन धर्म में जन्म लेकर संस्कृति को बचाने का आह्वान किया है।
बृहस्पतिवार को जैन धर्मशाला में दिगंबर जैन साधु सेवा समिति द्वारा आयोजित धर्म सभा में जैन संत श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज ने कहा कि धर्म से बढ़चढ़कर कुछ नही है। धर्म है तो सबकुछ है, लेकिन आज धर्म का पतन हो रहा है। सभी पापों में लिप्त हैं। कोई भी अपने अंदर झांकने को तैयार नहीं है। बाहर के दिखावे में लगे हुए हैं। संचय में लगे हुए है, जो हमें आगे बढ़ने नहीं देता। हर कार्य में रुकावट पैदा कर रहा है। हम बाहर से अच्छा दिखना चाहते हैं और अंदर की सजावट का प्रबंध नहीं करते। उन्होंने कहा कि मनुष्य के अंदर अच्छे संस्कार होंगे तो वह बाहर से भी अच्छा दिखाई देगा। जो णमोकार मंत्र के प्रति आस्था रखते हैं उसी को जैन अनुयायी समझा जाता है। भारत में जैन समाज के लोग अहिंसा की बात करते हैं, लेकिन उसको अपने अंदर धारण नहीं पा रहे। अहिंसावादी को महात्मा गांधी रहे। उन्होंने अहिंसा का रास्ता अपनाकर बहुत कुछ किया। धर्म प्रथम कड़ी है। हमें धर्म की रक्षा करनी चाहिए। हमें जैन कुल में जन्म लेकर संस्कृति को बचाना चाहिए। इस अवसर पर दिगंबर जैन साधु सेवा समिति अध्यक्ष जितेंद्र जैन एडवोकेट, अनिल जैन, प्रवीन जैन, वीरेश जैन, सलेकचंद जैन, मोहित जैन, नवीन जैन, अरविंद जैन, अजय जैन, संतोष जैन, राहुल जैन, पंकज जैन, अंकित जैन, अखिलेश जैन, ललित जैन आदि मौजूद रहे।