श्रावण मास के चतुर्थ सोमवार और दुर्गाष्टमी एक साथ होने पर सुबह से मंदिरों में श्रद्घालुओं की भीड़ लग गई। मंदिरों में जय माता दी और बोल बम, बम बम के उद्घोष से माहौल भक्तिमय हो गया।
श्रावण मास के साथ ही दुर्गाअष्टमी होने के कारण श्रद्धालुओं में भगवान शंकर का जलाभिषेक और शक्ति स्वरूप माता पार्वती और दुर्गा माता की पूजा अर्चना के लिए विशेष उत्साह रहा। शिव पिंडी मंदिर कचौरी नाथ और इसके परिसर में बने शाकंभरी देवी मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्घालुओं ने पहुंच भगवान भोले शंकर का जलाभिषेक किया और माता के मंदिर में पूजा अर्चना कर परिवार की सुख शांति की कामना की। प्राचीन मंदिर जस्सुवाला, बालाजी धाम , देवी मंदिर हलवाई अट्टा, शिव मंदिर, राज्यों की मोरी, कानूगोयान, कम्बोयान, दयाल आश्रम, आश्रम पंच तीर्थी, घंटों वाला मंदिर में भी श्रद्घालुओं ने बोल बम, बम-बम तथा जयमाता की उद्घोष के साथ जलाभिषेक कर पूजा अर्चना की। पंडित हरिओम शर्मा ने लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित सत्संग में शिव महिमा पर प्रकाश डालते हुए जलाभिषेक करने से आध्यात्मिक, शारीरिक और मानसिक लाभों के बारे में विस्तार से बताया।