थानाभवन। क्षेत्र में गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होने पर प्रशासन सहमति दिखा रहा है। मगर हकीकत ये है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल आधी भी गेहूं खरीद नहीं हो पाई। इस साल क्षेत्र के क्रय केंद्रों पर करीब 36 हजार क्विंटल गेहूं खरीद हुई। जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 76 हजार क्विंटल से अधिक था।
क्षेत्र में जिले के साथ एक अप्रैल से क्रय केंद्र शुरू किए गए थे। इसके लिए खाद्य रसद विभाग की ओर से हरड़ फतेहपुर, महावतपुर, हसनपुर लुहारी, जलालाबाद में दो, गदेवड़ा, बिरालसी, दूधली, मंडी परिसर में कुल नौ क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद शुरू की। गेहूं का समर्थन मूल्य 1840 रुपये क्विंटल तय किया गया। अब क्षेत्र की बात करें तो इस साल यहां गेहूं खरीद का लक्ष्य 35 हजार क्विंटल तय किया गया था। जबकि अब तक क्रय केंद्रों पर 36 हजार 221 क्विंटल खरीद हो चुकी है। इस आंकड़े से निश्चित रूप से प्रशासन संतुष्ट नजर आ रहा है। मगर पिछले साल की खरीद पर नजर दौड़ाएं, तो पिछले साल इन्हीं केंद्रों पर 76 हजार 79 क्विंटल गेहूं खरीदा गया था। जो इस साल के आंकड़ों से 39 हजार 857 क्विंटल अधिक है।
रकबे में आई कमी
अधिकारियों की मानें तो पिछले साल के मुकाबले इस साल गेहूं बुुआई का रकबा काफी कम रहा। इसलिए प्रशासन ने लक्ष्य भी कम कर दिया था। यही वजह है कि इस साल पहले के मुकाबले कम गेहूं केंद्रों तक पहुंचा।
दलालों के दाम अधिक
कम गेहूं क्रय केंद्रों तक पहुंचने की एक वजह यह भी थी कि इस बार दलाल भी क्षेत्र में खूब हावी रहे। दलाल सरकारी दाम से 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल अधिक दाम पर गेहूं खरीद रहे थे। कुछ दिन पूर्व प्रशासन ने करनाल भेजे जा रहे चार ट्राली गेहूं को पकड़ा भी था।
रकबा कम होने के कारण इस साल गेहूं खरीद पिछले साल से कम हुई है। हालांकि, हमने इस बार लक्ष्य को पूरा कर लिया है। साथ ही प्रशासन ने गेहूं के दलालों पर भी शिकंजा कसा है। - अमित यादव, वरिष्ठ विपणन निरीक्षक