अमर उजाला ब्यूरो
थानाभवन (शामली)। दो साल पहले हुई पिता की मौत के बाद घर मौजूद तीन बहनों और मां का सहारा बने बेटे अनुज की जब सड़क दुर्घटना में मौत की खबर पहुंची तो परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। अनुज ने परिवार को संभालने के लिए राजमिस्त्री का काम शुरू किया था और अपनी बीमार बहनों का उपचार करा रहा था।
क्षेत्र के गांव हसनपुर लुहारी निवासी बुद्धू रूहेला के घर में पत्नी देवकी, तीन बेटियां नीशू, शालू, रश्मि और एक बेटा अनुज था। बच्चों में सबसे बड़ी बेटी नीशू मनोरोगी है और रश्मि टीबी की बीमार है। दो साल पहले बीमारी के चलते बुद्धू की मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी अनुज (21) के कंधों पर आ गई। वह राजमिस्त्री का काम करता था। मंगलवार को भी वह चरथावल थाना क्षेत्र के पिलखनी गांव में काम कर शाम के समय बाइक से घर लौट रहा था। उसी समय एक एक कार ने बाइक में टक्कर मार दी। हादसे में अनुज की मौके पर ही मौत हो गई थी। जब उसकी मौत की खबर परिवार वालों को मिली तो कोहराम मच गया। मां और बहनों को रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार सहित पूरे मोहल्ले में शोक छा गया। बता दें कि अनुज न सिर्फ परिवार का पालन पोषण करता था, बल्कि बीमार बहन नीशू और रश्मि का भी उपचार करा रहा था। करीब डेढ़ साल पहले रश्मि की हालत ज्यादा खराब हो गई थी।