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हजरत इफ्तेखार उल हसन का इंतकाल बड़ी क्षति

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अमर उजाला ब्यूरो
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कैराना। हजरत मौलाना मुफ्ती इफ्तेखार उल हसन के इंतकाल से मुस्लिम समाज में शोक की लहर है। मदरसा इशातुल इस्लाम के मोहतमिम मौलाना बरकतुल्लाह अमीनी का कहना है कि मौलाना इफ्तेखार उल हसन ने यूपी के साथ-साथ पड़ोसी हरियाणा में भी इस्लाम मजहब को बढ़ावा देने के लिए काफी मेहनत की।
उन्होंने पानीपत में ऐतिहासिक मदरसा गुंबदान को दोबारा शुरू किया। पंजाब के शहर बरात के नजदीक नबियों की कब्रों के पास एक बड़ा मदरसा कायम कराया। जहां से आज भी बच्चे दीनी तालीम हासिल कर दुनियाभर में इस्लाम का पैगाम पहुंचा रहे हैं। इसी प्रकार सोनीपत और कैथल जैसे शहरों में भी दीन का बड़ा काम किया। मदरसा नासिरूल उलूम अशरफिया के मोहतमिम कारी का कहना है कि मौलाना इफ्तेखार उल हसन उच्च स्तर के पवित्र कुरान का उर्दू भाषा में अनुवाद करने वाले थे, जिन्होंने अपने शहर कांधला की जामा मस्जिद में 50 वर्षों तक लोगों को कुरान का पैगाम सुनाया। यही नहीं, अपने इलाके में कई मदरसों की स्थापना की। उनके इंतकाल से मुस्लिम समाज को अपूर्णीय क्षति हुई है।
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मदरसा दारूल उलूम महमूदिया के मोहमिम मौलाना इरफान कासमी का कहना है कि इफ्तेखार उल हसन तब्लीगी जमात के संस्थापकों में से एक थे। जिन्होंने इस जमात को बढ़ावा देने के लिए मुल्कभर के दौरे किए और मेवात के इलाके में खासी मेहनत की। उन्होंने समाज को नई दिशा देने का काम किया है। उधर, जमीयत उलमा तहसील ऊन के सदर मौलाना वासिल का कहना है कि इफ्तेखार उल हसन साहब कौम के सच्चे रहनुमा थे। जिन्होंने समाज को नई दिशा देने का काम किया। उन्होंने मुसलमानों को अपने वतन से मुहब्बत रखने और भाईचारा कायम रखने का संदेश दिया। उन्होंने कांधला और आसपास के इलाके को बड़ी पहचान दिलाई है।
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