अमर उजाला लाइव रिपोर्ट
शामली। प्रदेश सरकार भले ही सरकारी अस्पतालों में मरीजों के उपचार की सुविधा के दावे कर रही हो, लेकिन अस्पतालों की जमीनी हकीकत सरकार के दावों की पोल खोल रही है। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने दोपहर 12 बजे एक बजे तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामली की पड़ताल की। इस दौरान मरीज उपचार के लिए इधर से उधर भटकते हुए मिले। कई डाक्टरों के कक्ष पर ताला लगा था तो कई डाक्टरों की कुर्सी खाली मिली। डाक्टरों के बारे में पूछा गया तो बताया गया कि लखनऊ ट्रेनिंग में गए हुए हैं। जो डाक्टर यहां हैं उनमें किसी को मीटिंग में जाना बताया गया तो किसी ने कहा कि अभी थोड़ी देर पहले थे।
कक्ष नंबर एक चिकित्साधीक्षक
इस कक्ष में चिकित्साधीक्षक की कुर्सी खाली मिली। कक्ष में सीएचसी कर्मचारी हनीफ बैठे हुए थे। पूछने पर उन्होंने बताया कि चिकित्साधीक्षक डाक्टर रमेश चंद्रा लखनऊ ट्रेनिंग में गए हैं। कब लौटेंगे, इसके बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया। कक्ष में जो भी मरीज आया, वह चिकित्साधीक्षक के न मिलने पर मायूस होकर लौटने को मजबूर हुए।
कक्ष संख्या 16 महिला ओपीडी
इस कक्ष पर ताला लटका हुआ मिला। सीएचसी स्टाफ से जानकारी की गई तो बताया गया कि यहां पर एक नहीं तीन महिला चिकित्सकों की तैनाती है। इनमें डाक्टर मंजीत कौर लखनऊ ट्रेनिंग में गई है। दूसरी डॉक्टर विशाखा दो साल के लिए पीजी का कोर्स करने गई है। तीसरी डॉक्टर अनीता बत्रा मेडिकल अवकाश पर है। बताया गया कि पिछले तीन दिन से इस कक्ष पर ताला लगा है। महिला मरीज उपचार के लिए आते हैं, लेकिन महिला चिकित्सक के न मिलने पर मायूस होकर लौट रहे हैं।
कक्ष नंबर 11 डाक्टर विजेंद्र कुमार चिकित्साधिकारी
इस कक्ष पर ताला लगा हुआ मिला। एमबीबीएस डॉक्टर विजेंद्र कुमार के बारे में कर्मचारियों से जानकारी ली तो बताया कि वे कई दिन से ट्रेनिंग में गए हुए हैं। एक कर्मचारी ने बताया कि उनकी सप्ताह में बाद के तीन दिन लिसाढ़ में ड्यूटी रहती है। हो सकता है वे लिसाढ़ में गए हो। मरीज भी यही पूछते हुए मिले कि डाक्टर साहब कहां है, कब तक आएंगे, कुछ पता नहीं कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा था।
कक्ष नंबर 12 खाली मिली कुर्सी
यह कक्ष खुला हुआ था, इस पर सिर्फ कक्ष संख्या 12 लिखा हुआ है। अंदर कोई डाक्टर मौजूद नहीं थे। कुर्सी खाली थी। स्टाफ ने बताया कि इस कक्ष में नेत्र विशेषज्ञ डाक्टर विनोद कुमार और एमबीबीएस डाक्टर श्रीकांत शर्मा बैठते है। डॉक्टर विनोद कुमार के बारे में बताया गया कि वे कलक्ट्रेट में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में गए हैं, जबकि डाक्टर श्रीकांत शर्मा सरकारी कार्य के लिए अमरोहा गए हैं।
कमरा नंबर पांच में हो रहा था बच्चों का उपचार
इस कक्ष में मरीजों की भीड़ लगी थी। डाक्टर अनुपम सक्सेना बच्चों का उपचार करने में व्यस्त थे। यहां काफी भीड़ थी और चिकित्सक उपचार में व्यस्त थे। इसके अलावा कक्ष नंबर 18 में दंत रोग विशेषज्ञ डाक्टर अनुज मलिक भी अपने कक्ष में मौजूद थे।
अधीक्षक बोले लखनऊ मीटिंग में हूं
सीएचसी शामली के चिकित्साधीक्षक डाक्टर रमेश चंद्रा ने फोन पर बताया कि वे सीएचसी के लक्ष्य और क्वालिटी की ट्रेनिंग में लखनऊ आए हुए है। वे सोमवार तक सीएचसी पहुंचेंगे। उनके साथ सीएचसी से डाक्टर मंजीत कौर, डॉक्टर जगमोहन, स्टाफ नर्स एंजलीना, डॉक्टर नताशा, डॉक्टर साकेत अरोड़ा, डीपीएम आशुतोष भी लखनऊ ट्रेनिंग आए थे। ट्रेनिंग 29 और 30 मई को दो दिन तक चली।
मरीजों की जुबानी सीएचसी की कहानी
शुक्रवार को सीएचसी पर आए मरीजों ने डाक्टर न मिलने पर अपनी परेशानी बताई। बाबरी क्षेत्र के गांव हिरनवाड़ा निवासी अंशु अपने परिजनों के साथ महिला चिकित्सक के यहां उपचार कराने पहुंची। अंशु व उसके परिजनों ने बताया कि वे काफी देर तक महिला चिकित्सक के कक्ष के बाहर खड़े है। कक्ष पर ताला लगा हुआ है। जब उन्हें पता चला कि महिला चिकित्सक ट्रेनिंग में गई है तो वे मायूस होकर लौट गए।
गांव फुगाना निवासी रश्मि ने बताया कि वह महिला चिकित्सक के यहां उपचार कराने आई थी। उन्हें महिला चिकित्सक के कक्ष पर ताला लगा मिला। पूछने पर उन्हें बताया कि महिला चिकित्सक सोमवार को मिलेंगी। वहीं, सीएचसी पहुंची कांधला थानाक्षेत्र के गांव नाला निवासी तबस्सुम ने बताया कि उन्हें बुखार चल रहा है। उनका उपचार डाक्टर दीपक कर रहे है। वह करीब आधा घंटे से अधिक समय से डाक्टर की इंतजार कर रही है। इसके अलावा गांव ताना निवासी सत्यपाल सिंह ने बताया कि उनकी सर्जरी हो चुकी है। वह डाक्टर दीपक के पास आए थे। काफी देर से उनकी इंतजार में खड़े है। डाक्टर को मीटिंग में जाना बताया गया है। वहीं, गांव गोहरनी निवासी सचिन कुमार ने बताया कि उन्हें 25 तारीख को अमरनाथ यात्रा पर जाना है। इसके लिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र की जरूरत है। वह प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आए थे, लेकिन कक्ष संख्या एक में चिकित्साधीक्षक नहीं मिले।
सीएचसी में ये भी मिलीं अव्यवस्थाएं
सीएचसी शामली की पड़ताल में कई अन्य अव्यवस्थाएं भी देखने को मिलीं। अस्पताल के महिला वार्ड के नजदीक गैलरी में कुत्ता आराम से सोते हुए मिला। सीएचसी के कर्मचारी आते-जाते रहे, लेकिन कुत्ते पर किसी का ध्यान नहीं गया। इस गैलरी में जनरल वार्ड में मरीजों और तीमारदारों का आना जाना लगा रहता है। इसी दौरान एक्सरे कक्ष के बाहर कई मरीज नीचे फर्श पर बैठे मिले। उनके बैठने के लिए कोई बेंच नहीं थी। कैमरे की फ्लैश लगते ही स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें गैलरी से उठाकर अंदर कमरे में भेज दिया। पूछने पर उन्होंने बताया कि डाक्टर ने उन्हें कहा था कि बाहर बैठ जाओ, जब नंबर आएगा तब अंदर आना।