अमर उजाला ब्यूरो
शामली। सपा-बसपा और रालोद गठबंधन के बाद जाट मतदाताओं का रुख काफी अहम माना जा रहा था। गठबंधन प्रत्याशी को उम्मीद थी कि गठबंधन की वजह से रालोद का जाट वोट उन्हें मिलेगा, लेकिन चुनाव परिणामों से साफ है कि जाटों ने भाजपा के पक्ष में खुलकर मतदान किया। दंगाग्रस्त जाट बहुल गांवों में भाजपा के पक्ष में लगभग एकतरफा मतदान हुआ।
कैराना लोकसभा सीट पर ये भी शोर मचा था कि जाट मतदाता यहां पर सपा प्रत्याशी का साथ देंगे, जबकि मुजफ्फरनगर में चुनाव लड़ रहे रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह को वहां मुस्लिमों का साथ मिलेगा, लेकिन चुुनाव परिणामों से ये बात साफ हो गई कि शामली क्षेत्र के जाटों ने गठबंधन प्रत्याशी का साथ नहीं दिया। जाट बहुल गांवों में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान हुआ। खुद दंगाग्रस्त जाट बहुल लांक लिसाढ़ और बहावड़ी में जाट मतदाताओं ने भाजपा को पसंद किया। यहां भाजपा का परचम लहराया।
हालांकि जाट मतदाताओं के पास कांग्रेस के जाट प्रत्याशी हरेंद्र मलिक का भी विकल्प था, लेकिन संभवत: उनका चुनाव कमजोर देख उन्होंने भाजपा का साथ देना ही बेहतर समझा। दंगाग्रस्त तीनों गांव के चुनाव परिणाम के अनुसार इन गांवों के कई बूूथों पर तो सपा प्रत्याशी तबस्सुम हसन तीन अंकों तक भी नहीं पहुंच सकी। बहावड़ी गांव के एक बूथ पर तो उन्हें केवल 11 मत ही मिले, जबकि लिसाढ़ के एक बूथ पर उन्हें केवल तीन वोट ही हासिल हुए। हालांकि लांक के कुछ बूथ पर तबस्सुम हसन ने कांटे का मुकाबला कर अच्छे मत लिए लेकिन आगे भाजपा ही रहे। कुछ बूथों पर तबस्सुम हसन से ज्यादा मत कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र मलिक को मिले हैं। बहावड़ी में कांग्रेस प्रत्याशी को अच्छे मत मिले हैं।
बूथ गांव प्रदीप तबस्सुम
128 बहावड़ी 336 11
129 बहावड़ी 349 24
131 बहावड़ी 453 64
132 बहावड़ी 489 72
135 लांक 418 150
136 लांक 392 51
141 लांक 292 60
180 लिसाढ़ 544 32
182 लिसाढ 117 3
177 लिसाढ़ 400 53
179 लिसाढ़ 340 28
दंगा प्रभावित गांवों में हुआ ध्रुवीकरण
- हिंसा प्रभावित जाटों के गांवों में जीती भाजपा
- मुस्लिम बाहुल्य गांवों में गठबंधन को मिले वोट
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। लोकसभा चुनाव में दंगा प्रभावित गांवों में हुए ध्रुवीकरण ने गठबंधन को दरकिनार करते हुए भाजपा को जिताया। हिंसा प्रभावित जाटों के गांवों में भाजपा को अधिक वोट मिले, जबकि मुस्लिम बाहुल्य गांवों में गठबंधन को वोट तो मिले, लेकिन भाजपा को जीतने से नहीं रोक सके।
पुरबालियान के 13 बूथों पर गठबंधन को 5576 तथा भाजपा को 3162 मत मिले है। यहां धर्म के आधार पर मतदाताओं का अनुपात इतना ही है। सोरम गांव में मजहब के लिहाज से ही वोटिंग होता दिखाई दिया। सोरम के 11 बूथों में मुस्लिम बाहुल्य बूथों पर छोटे चौधरी को 3768 तथा डॉ बालियान को हिंदू बाहुल्य बूथों पर 2968 वोट मिले। शाहपुर के काकड़ा गांव में पांच बूथों पर वोटों का बंटवारा यही सच बयां करता है। यहां पर गठबंधन को केवल 784 मत मिले, क्योंकि दंगे के बाद गांव छोड़ गए ज्यादातर मुस्लिम वापिस नहीं लौटे है। भाजपा के पक्ष में 2728 वोट डाले गए। काकड़ा बालियान खाप का बड़ा गांव है। दंगा प्रभावित रहे खरड़ गांव के पांच बूथों पर गठबंधन को 1525 और भाजपा को 2731 जो मत मिले। मुंडभर गांव में दंगे के दौरान बड़ी आगजनी हुई थी। सिसौली क्षेत्र के इस गांव में तीन बूथों पर भाजपा को 1292 और गठबंधन को 492 वोट ही मिल पाए। फुगाना में भी वोटिंग में दंगों का असर ही दिखाई दिया। गठबंधन को छह बूथों पर 1436 तथा भाजपा को 2506 वोट मिले। नंगला मंदौड़ पंचायत में जाते ग्रामीणों पर शाहपुर के बसी में आपसी संघर्ष हुआ था। मुस्लिम बाहुल्य बसीकलां के चार बूथों पर अजित सिंह को 2193 तथा बालियान को मात्र 248 वोट मिल सके।
कुटबा-कुटबी में भाजपा को एकतरफा वोटिंग
मुजफ्फरनगर। कुटबी सांसद डॉ संजीव बालियान का पैतृक गांव है। संसदीय चुनाव में कुटबा-कुटबी में चौधरी अजित सिंह को सिर्फ 391 वोट मिले, जबकि बालियान को 3993 मत मिले।