शामली। श्रम विभाग की मंडलीय टीम ने रविवार को शहर के बाजारों में छापेमारी की। टीम के आते ही साप्ताहिक बंदी में भी खुली दुकानें ताबड़तोड़ बंद होती चली गईं। टीम ने साप्ताहिक बंदी के उल्लंघन पर 34 दुकानों के चालान कर दिया।
शहर में रविवार का दिन साप्ताहिक बंदी के लिए तय है, लेकिन इसके बावजूद भी शहर के बाजार खुले रहते थे। अधिकतर दुकानदार दुकानें खोलकर बैठते थे। ऐसे में दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश नहीं मिलता था। समय समय पर कर्मचारी इसकी शिकायतें भी करते हैं। पिछले दिनों कैराना कस्बे में भी प्रशासन और श्रम विभाग की टीम ने प्रयास कर बुुधवार के दिन बंदी लागू कराई थी, लेकिन शहर में बंदी व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही थी। शामली का चार्ज देख रहे सहायक श्रमायुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि रविवार को मंडल स्तर पर गठित श्रम विभाग की मंडलीय टीम जिसमें श्रम प्रवर्तन अधिकारी मुजफ्फरनगर बीएस रावत और श्रम प्रवर्तन अधिकारी सहारनपुर केपी सिंह शामिल थे। इस टीम ने शामली शहर के बाजारों में जाकर छापेमारी की। अधिकतर बाजारों में कई दुकानें खुली थीं। टीम ने अलग अलग बाजारों में 34 व्यापारियों की दुकानों के चालान किए। साथ ही बाजारों में साप्ताहिक बंदी के दिन बाजार बंद रखने की अपील की। सहायक श्रमायुक्त ने बताया कि बेहतर होगा कि व्यापारियों को अपनी स्वेच्छा से बाजार बंद रखने चाहिए । कैराना के व्यापारियों ने इसमें सहयोग दिया है। इसी तरह शामली के व्यापारी भी सहयोग करें। ये अभियान लगातार जारी रहेगा।
सालों बाद बंद नजर आया शहर
बाजार में श्रम विभाग की छापेमारी के चलते दुकानदार अपनी दुकानें धड़ाधड़ बद करने लगे। रविवार दोपहर बाद पूरा शहर बंद नजर आया। सालों बाद शहर के बाजार बंद थे। पूरे शहर में ये मामला चर्चाओं में रहा।
शापिंग मॉल्स की तरह बाजार भी बंदी मुक्त होने चाहिए : घनश्यामदास
शामली। व्यापारी नेता घनश्याम दास गर्ग बंदी के विरोध में आ गए। उन्होंने कहा कि बड़े बड़े शापिंग मॉल पूरे सप्ताह खुलते हैं। छोटे दुकानदारों पर बंदी का नियम लागू किया जाता है। सरकार ने जिस तरह मॉल्स को छूट दी है उसी तरह बाजारों को बंदी मुक्त करें। यदि ऐसा नहीं हुुआ तो इन मॉल्स के कारण पहले से ही खत्म हो रहा कारोबार पूरा ही चौपट हो जाएगा।