शामली। कैराना लोकसभा चुनाव में नामांकन प्रक्रिया हो चुकी है। अब राजनीतिक दलों का फोकस अपनी वोटों की रखवाली करने और दूसरे प्रत्याशी की वोटों में सेंध लगाने पर हो गया है। इसी लिहाज से नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो गांव दर गांव अपनी रिश्तेदारी और अन्य संपर्क निकालकर मतदाताओं को लुभाने में जुटे हुए हैं। इस कार्य में भाजपा के साथ ही गठबंधन से रालोद और सपा के नेता भी लगे हुए हैं।
28 मई को कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए मतदान होना है। उससे पहले राजनीतिक दल अपने प्रत्याशी को जिताने की भरपूर कोशिश में लगे हुए हैं। जैसे जैसे मतदान की तिथि नजदीक आ रही है, वैसे ही चुनाव प्रचार में तेजी आने लगी है। एक तरफ भाजपा के मंत्री, सांसद और विधायकों के अलावा संघ के जिला विस्तारक और प्रचारकों को चुनाव प्रचार में लगाया हुआ है। वहीं, भाजपा की तरफ से जातीय समीकरणों को साधने के लिए भी नेता भेज रखे हैं। व्यापारियों को साधने के लिए व्यापारी वर्ग के नेता भेजे गए हैं, तो जाट बिरादरी में जाट और कश्यप बिरादरी में कश्यप समाज के नेताओं को भेजा हुआ है। इन नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि अपनी बिरादरी के लोगों में पहुंचकर बैठक करें और भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा मतदान के लिए अपील करें। भाजपा की तरफ से खासकर जाट बिरादरी में पैठ बनाई जा रही है। वहीं, सपा-रालोद गठबंधन की प्रत्याशी तबस्सुम हसन के पक्ष में भी एक तरफ रालोद के जाट नेता जाटों के बीच पहुंच रहे हैं, ताकि रालोद के परंपरागत वोटरों को अपनी ओर ज्यादा से ज्यादा किया जा सके। इसके अलावा समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम नेताओं को मुसलिम बिरादरी में, तो गुर्जर नेताओं को गुर्जर और कश्यप समाज के नेताओं को कश्यप बिरादरी में भेज रखा है।