आर्य समाज में चल ररहे सात दिवसीय श्रावणी पर्व के दूसरे दिन दिल्ली से आए वैदिक प्रवक्ता आचार्य वेद प्रकाश क्षोत्रीय ने कहा कि श्रावणी पर्व स्वाध्याय का पर्व है। स्वाध्याय से अयुदय व परमपिता परमात्मा से साझा होता है। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि रामायण के प्रसंगों का सजीव वर्णन किया। फरीदाबाद से आए प्रदीप शास्त्री ने भजन प्रस्तुत कर वेदवाणी की प्रस्तुति दी।
सोमवार को आर्य समाज के सभागार में श्रावणी पर्व के दूसरे दिन आचार्य वेदप्रकाश ने महर्षि वाल्मीकि रामायण के श्रीराम चंद्र के प्रसंगों का वर्णन किया। कहा कि जो थोडे़ किए उपकार से संतुष्ट हो जाता है वहीं राम है। भरत मिलाप, सीता हरण, रावण वध प्रसंगों के माध्यम से भरत प्रेम, हनुमान जी की बुद्धिमता और श्रीराम के चरित्र का सुंदर वर्णन किया। कहा कि परमात्मा की आज्ञा का पालन करें। मुजफ्फरनगर से आए आचार्य गुरुदत्त आर्य ने आचार्य वेदप्रकाश का शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया। मौके पर संरक्षक रघुवीर सिंह आर्य, संरक्षिका कमला आर्या, आर्य समाज के प्रधान विनोद आर्य, मंत्री देवेंद्र देव आर्य, कोषाध्यक्ष रविकांत आर्य, आर्य विद्या संस्था के प्रधान राजपाल आर्य, मंत्री दिनेश आर्य, कोषाध्यक्ष रामेश्वर दयाल आर्य, स्त्री आर्य समाज से कौशल्या देवी, सुनीता आर्य, ऊषा आर्य, सूर्य प्रताप आर्य, उत्सव आर्य, शुभम आर्य, श्वेता आर्या, मृणाली आर्या, प्राची आर्या, अवंतिका आर्या आदि उपस्थित रहे।