शामली। ट्रेनों का संचालन सुरक्षित करने और लेट होने से बचाने के लिए उत्तर रेलवे ने फ्लाइडिंग गेट की कवायद शुरू कर दी है। दिल्ली-शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग पर सभी रेलवे फाटकों पर फ्लाइडिंग गेट बना दिए हैं। जल्द जून माह में इस मार्ग पर फ्लाइडिंग गेट व्यवस्था लागू हो जाएगी। रेलवे फाटक पर बैरियर क्षतिग्रस्त होने पर फ्लाइडिंग गेट ट्रेनों के संचालन और पैदल यात्रियों की राह आसान कर देगी।
उत्तर रेलवे ने दिल्ली-शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग पर ट्रेनों का संचालन नियमित करने के लिए गत वर्ष रेलवे फाटकों पर टाइमर लगा गए थे। रेलवे फाटकों पर टाइमर लग जाने के बाद ट्रेन आजाने के बाद रेलवे फाटक बंद हो जाते हैं। फाटक से ट्रेन गुजरने के बाद रेलवे बैरियर खुल जाता है। दिल्ली-शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग पर अक्सर रेलवे फाटक के गेट पर लगे बैरियर को अक्सर भारी वाहनों द्वारा टक्कर मार दिए जाने व अन्य सिस्टम फेल हो जाने के बाद बैरियर के क्षतिग्रस्त होने के बाद ट्रेनों के संचालन में गेटमेनों की मुुुसीबत बढ़ जाती थी। गेटमैन क्षतिग्रस्त रेलवे फाटक के बैरियर के स्थान पर जंजीर लगाकर ट्रेनों का संचालन कराना पड़ता था। रेलवे का सिगनल डाउन न होने से ट्रेन आउटर पर खड़ी हो जाती थी। इस प्रकार की परेशानियों से निपटने के लिए उत्तर रेलवे ने ट्रेनों का नियमित संचालन करने के उद्देश्य से फ्लाइडिंग गेट की व्यवस्था बनाई है। उत्तर रेलवे के सिगनल इंजीनियर अमित कुमार पांडे ने बताया कि दिल्ली- शामली, सहारनपुर रेलवे लाइन पर लोनी से लेकर सहारनपुर जिले के टपरी तक सभी 21 रेलवे फाटकों पर फ्लाइडिंग गेट की व्यवस्था कर दी है। इस व्यवस्था को लागू करना शेष है। उम्मीद है कि जून माह से दिल्ली-शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग पर फ्लाइडिंग गेट की व्यवस्था लागू हो जाएगी। दिल्ली डिवीजन में 75 प्रतिशत फ्लाइडिंग गेट की व्यवस्था लागू है।
क्या है फ्लाइडिंग गेट की व्यवस्था
रेलवे फाटक सिस्टम फेल होने और बैरियर क्षतिग्रस्त होने पर गेट मेन के माध्यम से फाटक वाली सड़क को ब्लाक करेगा। तालों समेत इंटर लॉकिंग के माध्यम से सिग्नल डाउन हो जाएगा। ट्रेनों का संचालन सुरक्षित होगा। कोई भी ट्रेन लेट नहीं होगी। पैदल यात्री ब्लाक रोड से आसानी से निकल जाएंगे। पैदल यात्रियों को अब रेलवे फाटक पर नहीं रुकना पड़ेगा।