अमर उजाला ब्यूरो
शामली। शुगर मिलें चलाने और बकाया गन्ना भुगतान को लेकर शनिवार को भाकियू ने कलक्ट्रेट में डेरा डाल दिया। उन्होंने प्रदेश सरकार को किसान विरोध बताते हुए जमकर हंगामा किया। डीसीओ से दो बार हुई वार्ता विफल होने पर कलक्ट्रेट पर बेमियादी धरना शुरू करने की घोषणा कर दी गई।
भाकियू प्रदेश प्रवक्ता कुलदीप पंवार, जिलाध्यक्ष मा. जाहिद के नेतृत्व में दर्जनों किसान ट्रैक्टर ट्रॉलियों से शनिवार दोपहर को कलक्ट्रेट पहुंचे। किसान अपने साथ गन्ने की पुलियां भी लिए हुए थे। उन्होंने कलक्ट्रेट परिसर में ट्रॉलियां घुसा दीं और दीवारों से गन्ने बांधकर वहां धरना देकर बैठ गए। धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए भाकियू जिलाध्यक्ष मास्टर जाहिद ने कहा कि 30 अक्तूबर तक मिलें चलाने की बात कही गई थी लेकिन थानाभवन को छोड़ कोई भी मिल नहीं चलने वाली। दिवाली के बाद ही चलने की बात कही जा रही है। मिल लेट हुई तो गेहूं की बुवाई भी प्रभावित हो जाएगी। धरने मेें गुड्डू, प्रदीप त्यागी, नदीम, रजनीश, पद्म सिंह, विनोद आदि किसान थे।
डीसीओ से वार्ता विफल और अनिश्चितकालीन धरने का एलान
शामली। डीसीओ ने किसानों के बीच जाकर दो बार वार्ता की। भरोसा दिया कि 31 नवंबर तक बकाया भुगतान कराने और दिवाली बाद मिल चलाने की बात कही लेकिन किसान राजी नहीं हुए। दो बार की वार्ता विफल होने पर भाकियू नेताओं ने कलक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन धरने का एलान कर दिया। जिलाध्यक्ष मास्टर जाहिद ने बताया कि 30 तक मिल चलाने और बकाया भुगतान ही उनकी दो मांग है। ये पूरी होने पर धरना जारी रहेगा।
हर साल ड्रामा करते हैं मिल वाले
शामली। किसानों का कहना था जब मिल चलाने की बात होती है तो मिल वाले क्षमता बढ़ाने का ड्रामा शुरू कर देते हैं। इसके लिए मिल वालों को कई महीने मिलते हैं जब ये काम नहीं होते। पेराई सत्र खत्म होने के बाद ये काम होने चाहिए ।गन्ना विभाग के अफसर भी मिल वालों का ही पक्ष लेते हैं। जरूर उनकी मिल वालों से कोई सांठगांठ होती होगी।
किसान की नहीं सोचती सरकार
वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार रोज नई योजनाएं चलाने की बात करती है। रोज नए नए फोटो देखने को मिलते हैं लेकिन किसानों के बारे में कोई योजना नहीं लाती। किसान का गन्ना टाइम पर खरीद लिया जाए और समय पर उसे भुगतान मिल जाए तो उसे ये सब करने की नौबत ना पड़े लेकिन सरकार को किसानों को कोई वास्ता नही।
एडीएम की कार पर भी लगाए गन्ने
किसानों ने कलेक्ट्रेट में खड़ी एडीएम की कार पर भी गन्ने खड़े कर दिए। ये देख वहां मौजूद कुछ तहसील कर्मी हटाने को बढ़े, लेकिन किसानों के तेवर देख वो भी पीछे हो गए। इस दौरान किसानों ने जमकर नारेबाजी भी की।
साहब गाड़ी नहीं जाने देंगे
डीएम से मिलने आए वाणिज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर एके दोहरे की कार कलक्ट्रेट परिसर में खड़ी थी। पास में ही किसान धरना देकर बैठे थे। डीएम से मिलने के बाद डिप्टी कमिश्नर कार लेकर लौटने लगे तो किसानों ने उनकी कार को घेर लिया और कहा कि कार नहीं जाने दी जाएगी। घंटो तक दोहरे कलक्ट्रेट में ही बैठे रहे। देर शाम उनकी कार निकलने दी गई।
मिल अफसरों को घंटो बैठाए रखा
शामली। गन्ना राज्यमंत्री की सख्ती के चलते 31 अक्तूबर तक मिल चलाने के लिए मिलों पर पूरा दबाव बनाया गया। डीएम ने सुबह 11 बजे ही डीसीओ के माध्यम से मिल अधिकारियों को कलक्ट्रेट में बुुलवा लिया था। थानाभवन तो 29 तक मिल चलाने को तैयार थी, लेकिन शामली ओर ऊन मिल के पार्ट्स ना आने की वजह से नवंबर के पहले सप्ताह पर अड़ी थी। मिल अधिकारियों से कई डीसीओ से वार्ता की। डीएम ने भी पूरा प्रयास किया लेेकिन बात नहीं बनी।
मिल अधिकारियों से वार्ता के बाद बात नहीं तो
जिलाधिकारी द्वारा भी मिल जल्दी चलाने का पूूरा प्रयास किया गया लेकिन ऊन और शामली मिलों ने भी क्षमता वृद्वि की वजह से मजबूरी जता दी। मिल अधिकारी दिवाली तक मिल चलाने की बात कह रहे हैं। किसान उससे सहमत नहीं हुए । अभी भी प्रयास जारी हैं। - अनिल भारती ,जिला गन्नाधिकारी