शामली। पालिका प्रशासन ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से लाइसेंस शुल्क वसूलने की तैयारी तेज कर दी है। पालिका की ओर से 118 प्रतिष्ठानों को नोटिस भेजे गए हैं। जिन्होंने पिछले 15 सालों से शुल्क जमा नहीं कराया है। इन पर पालिका का लगभग बीस लाख रुपये बकाया है। इनमें करीब 60 नर्सिंग होम और क्लीनिक है।
नगर पालिका नर्सिंग होम, क्लीनिक और पेथोलॉजी समेत 30 तरह के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से शुल्क वसूलेगी। इसके लिए शहर के 118 प्रतिष्ठानों को चिह्नित कर नोटिस जारी किए गए हैं। इन सभी प्रतिष्ठानों पर पालिका का करीब 20 लाख रुपये का शुल्क बकाया है। यह शुल्क पिछले 15 सालों से पालिका को नहीं दिया गया।
अब नए आदेशों के बाद पालिका प्रशासन ने इन प्रतिष्ठानों से शुल्क वसूलने की तैयारी शुरू कर दी है। पालिका की ओर से जिन प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें करीब 60 क्लीनिक, नर्सिंग होम और पेथोलॉजी लैब भी शामिल हैं।
वर्ष 1999 में पालिका ने नर्सिंग होम, क्लीनिक और पेथोलॉजी लैब समेत 30 तरह के प्रतिष्ठानों को व्यवसायिक माना गया और उनसे शुल्क वसूले जाने का गजट जारी किया गया। इसमें प्रत्येक प्रतिष्ठानों के लिए अलग-अलग दर का शुल्क निर्धारित किया गया। जैसे 30 बेड वाले नर्सिंग होम के लिए दो हजार रुपये, उससे अधिक क्षमता वाले नर्सिंग होम के लिए अधिकतम पांच हजार, ड्राइक्लीनर्स पर एक हजार रुपये वार्षिक का शुल्क निर्धारित किया गया है।
पालिका द्वारा शुल्क लगाए जाने के विरोध में वर्ष 2000 में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कोर्ट में याचिका डाली थी, जिस पर 2001 में स्टे हो गया और कोई लाइसेंस शुल्क वसूलने की कार्रवाई नहीं हुई। बाद में चार जुलाई 2006 को उच्च न्यायालय ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा डाली गई याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि नर्सिंग होम नगर निकायों द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं का उपयोग करते हैं और उनके द्वारा उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सेवाओं के बदले में वह धन अर्जित करते हैं। जिस कारण इनसे लाइसेंस शुल्क वसूला जाना चाहिए।