कैराना (शामली)।
कई दौर की वार्ता के बाद आखिरकार विपक्षी दलों के नेताओं ने हसन परिवार में एकता कायम करा दी है। लोकदल प्रत्याशी कंवर हसन से वार्ता करने को जाट और मुस्लिम वर्ग के नेताओं ने अहम प्रयास किया। इसी के चलते कैराना उपचुनाव में लोकदल प्रत्याशी कंवर हसन ने रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन का समर्थन कर दिया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में सांसद मुनव्वर हसन की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद हसन परिवार में सियासी विरासत को लेकर जंग छिड़ गई थी। जिसके बाद कभी यह परिवार एक साथ आया, तो कभी दूरियां बनी रहीं। बीते नगर निकाय चुनाव में जहां हाजी अनवर हसन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े थे, तो उनके भतीजे विधायक नाहिद हसन सपा प्रत्याशी राशिद अली के पक्ष में लगे हुए थे। इसके अलावा 2014 के लोकसभा चुनाव में भी सपा के टिकट पर नाहिद हसन प्रत्याशी थे, तो कंवर हसन बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। हालांकि जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में हसन परिवार एक हो गया था। अब कैराना सीट के उपचुनाव में फिर से हसन परिवार के सदस्यों में सियासी तलवारें खिंच गई थीं, लेकिन सपा, रालोद और कांग्रेस नेताओं ने परिवार में एकता कायम करने के लिए भरपूर प्रयास किया और उसका सार्थक परिणाम बृहस्पतिवार को सामने आ गया।
बृहस्पतिवार को रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी, कांग्रेस के पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, बतीसा खाप के चौधरी सूरजमल, गठवाला खाप के थांबेदार बाबा श्याम सिंह, कालखंडे खाप के चौधरी संजय सिंह, कांग्रेस नेता मजाहिर राणा, रईस राणा जौला आदि कंवर हसन के आवास पर कैराना में मोहल्ला आलदरम्यान में पहुंचे। वहां बंद कमरे में मंत्रणा हुई, जिसके बाद कंवर ने तमाम गिले-शिकवे दूर कर दिए। समर्थकों के बीच कंवर हसन ने कहा कि मैं जयंत चौधरी के नेतृत्व में साथ जुड़ा हूं। जयंत चौधरी मेरे पुराने अच्छे मित्र भी हैं। सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ने के लिए ही मैंने यह फैसला किया है। वहीं, जयंत चौधरी ने कहा कि पार्टी में कंवर हसन और उनके सहयोगियों के मान-सम्मान में कोई कमी नहीं आएगी। इस दौरान नगर पालिका परिषद कैराना के चेयरमैन हाजी अनवर हसन, असगर, हारून, उमर बागबां, सलीम बागबां, आलिम, तौसीफ सिद्दीकी, मुंशी अनवर, सईद सिद्दीकी, जाबिर मुखिया, कय्यूम, हाजी खुर्शीद, वकील सभासद, हाजी मुस्तुफा, मेहरदीन, महताब रामड़ा, अहमद चौधरी, जावेद अली, डॉ. कय्यूम, रिजवान आदि मौजूद रहे।