शामली। आम बजट में कपडा़ व्यापारियों को कोई भी राहत न मिलने से व्यापारी आम बजट से नाखुश नजर आए। व्यापारियों का कहना है कि दुकानों पर आम खर्चे बढ़ते जा रहे है जबकि आम बजट में आयकर की सीमा में बढ़ोत्तरी नहीं की गई। जिससे व्यापारियों में नाराजगी है।
बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट पेश किया, तो किसान से लेकर युवाओं को लुभाने वाली बातें कहीं, मगर कपडा़ व्यापारी नाराज नजर आए। कबाडी़ बाजार में कपडा़ व्यापारी रमेश चंद ने कहा कि व्यापारियों को बजट से काफी उम्मीदे थी। सोचा था कि सरकार टैक्स के स्लैबों में बदलाव कर कुछ राहत देगी। जबकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। पहले कपडा़ कर मुक्त था, लेकिन सरकार ने कपड़े पर 5 और 12 प्रतिशत जीएसटी लागू कर दिया। आयकर की सीमा ढाई से बढ़ाकर चार लाख रुपये किया जाना चाहिए था। दुकानों पर नौकर, बिजली बिल, पैकिंग व अन्य खर्चे बिक्री का करीब 10 प्रतिशत तक बैठ जाता है। अगर आयकर की स्लैबो में बदलाव होता तो टैक्स से सरकार के खजाने भरते। वहीं रेडीमेंट गारमेंटस व्यापारी अतुल बंसल ने बताया कि सरकार के कपड़े पर जीएसटी लगाने के बाद से दुकान पर कर्मचारियों और अन्य खर्चों में कटोती कर दी थी। अब दुकान पर करीब 20 नौकर कार्य करते है। जिनका वेतन हर माह करीब लाखों रुपये से भी ज्यादा बैठता है। जीएसटी लगने के बाद कपड़े पर बचत कम और खर्चें ज्यादा हो गए। आम बजट से टैक्स में कुछ छूट की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। जिसके चलते फिर से दुकान पर नौकर और अन्य खर्चों में कमी करनी पडेगी। जिससे व्यापार में ज्यादा नुकसान न हो।