सात समंदर पार तक फैला दिया माचिस का कारोबार
शामली। खेल, शिक्षा और कृषि के साथ ही युवा पीढ़ी उद्योग जगत में भी झंडे गाड़ रही है। उनमें से एक हैं युवा उद्यमी अनुज गर्ग। पढ़े लिखे होनहार अनुज ने 2011 में माचिस की तीली बनाने की फैक्ट्री लगाने से कारोबार की शुरुआत की। फिर 2014 में पूरी माचिस बनानी प्रारंभ कर दी। तकनीकी जानकारी और तरक्की की तमन्ना के साथ आज अनुज गर्ग ने माचिस का कारोबार न केवल देशभर में फैलाया, बल्कि विदेशों तक अपनी पकड़ बना ली।
शामली निवासी अनुज गर्ग कंडेला औद्योगिक क्षेत्र में अमर स्प्रिंलटस प्राइवेट लिमिटेड के संचालक हैं। उनकी फैक्ट्री में माचिस बनाई जाती हैं। उनके पिता श्रीनिवास गर्ग भी कारोबार में बराबर हाथ बंटाते हैं। अनुज की उम्र अभी सिर्फ 38 वर्ष है। मुजफ्फरनगर के एसडी कॉलेज से एमकॉम करने के बाद वह माचिस के कारोबार को बढ़ावा देने में लग गए थे। उन्होंने बताया कि 25 साल पूर्व उनके पिता ने माचिस की तीली बनाने का कार्य प्रारंभ किया था, लेकिन किन्हीं कारण से बाद में यह कार्य बंद हो गया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मन में ठान लिया कि इसी कारोबार के जरिये अपना और अपने परिवार का नाम रोशन करना है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2011 में उन्होंने फिर से माचिस की तीली बनाने का कार्य प्रारंभ किया। धीरे धीरे कारोबार अच्छा हुआ, तो 2014 में पूरी माचिस ही बनानी प्रारंभ कर दी, तब तक माचिस बनाने की कंपनी दक्षिण भारत में सिर्फ तमिलनाडु में होती थी, क्योंकि माचिस का कच्चा माल आसानी से उपलब्ध नहीं होता था। इसके बाद उत्तर भारत में उन्होंने शामली में माचिस बनाने की फैक्ट्री स्थापित की। उन्होंने बताया कि 2014 में करीब डेढ़ करोड़ रुपये का टर्न ओवर था, जो धीरे धीरे अब 35 से 40 करोड़ रुपये के टर्न ओवर तक पहुंच गया। उन्होंने बताया कि उनकी फैक्ट्री में करीब 350 श्रमिक कार्य करते हैं।
विदेशों में कर रहे माचिस का एक्सपोर्ट
युवा उद्यमी अनुज गर्ग बताते हैं कि उनकी फैक्ट्री से आईटीसी और होमलाइट के लिए माचिस तैयार करके सप्लाई करते हैं। इसके अलावा अफ्रीकी देश घाना, कीनिया और इथोपिया की कंपनी को भी सप्लाई कर रहे हैं। अनुज का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण कुछ परे शानियां हुई थीं, लेकिन धीरे धीरे प्रक्रिया आसान हो गई। अब किसी तरह की दिक्कत नहीं है।