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दूसरे दिन भी आकाश में छायी रही धूल- रेत के कण

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धूल के गुबार से जिंदगी सांसत में
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शामली। वातावरण में बढ़ता प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। मुख्य रूप से दमा पीड़ितों के लिए काफी मुश्किलों का दौर हैं। शामली कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉक्टर पीके सिंह ने बताया कि राजस्थान से उड़कर आ रहे रेत और धूल से भरे कण दूसरे दिन भी वातावरण में घुले रहे। आसमान में धूल भरी धुंध के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। रेत और धूल के कण बारिश के बाद समाप्त हो पाएंगे। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक शुक्रवार की शाम के बाद बूंदाबांदी के आसार हैं। बूंदाबांदी के बाद मौसम में बदलाव आने की उम्मीद हैं।
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बृहस्पतिवार को सुबह से शाम तक आसमान में धूल छाई रही। दोपहर मेें तेज धूप निकली। कई बार धूल भरी आंधी के आसार बने, लेकिन हवा की रफ्तार केवल 21 किलोमीटर प्रति घंटा रहने से गर्मियों से लोगों को निजात नहीं मिली। दिन का तापमान 40 व न्यूनतम 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पूरे दिन मौसम की बेरुखी के कारण लोगों का हाल बेहाल रहा। आकाश में रेत- धूल के कणों के कारण वाहन चालकों को दूर तक साफ दिखाई नहीं पड़ रहा था। नतीजतन चालकों को वाहन चलाने में काफी दुश्वारियां हुई। दिन के समय धूप के कारण धूल और रेत के कण का असर कम रहा। शाम के समय धूल- रेत के कणों का ज्यादातर असर रहा। मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार की शाम के बाद बूंदाबांदी के बाद मौसम में बदलाव आएगा। शनिवार, रविवार और मंगलवार तक आकाश में बादल छाए रहेंगे। बूंदाबांदी होने के आसार हैं। धूल व रेत के कण आकाश में छाए रहने से युवक, युवतियों, अधेड़ व वृद्ध को सांस लेने में परेशानी में डाल सकते है। इसीलिए राहगीरों और खेतों में काम करने वालों लोगों को धूल व रेत कण से बचने का जोर दिया गया है। शामली कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक डाक्टर पीके सिंह ने बताया कि राजस्थान से उड़कर आ रहे रेत व धूल से भरे कण दूसरे दिन मे कोई सुधार नही ंहुआ है। उनका कहना है कि शुक्रवार की शाम के बाद बूंदाबांदी के आसार हैं।
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