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तिरंगे के लिए हम जान भी कुर्बान कर देंगे।

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शामली। देश के प्रसिद्ध कवि गोपालदास नीरज की स्मृति मेें साहित्यिक संस्था कांरवां की ओर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया गया। अब्दुला राज देवबंदी ने देश भक्ति पर काव्य पाठ करते हुए कहा कि अगर सर की जरूरत है, तो फिर सर भी कटा कर हम वतन के वास्ते हर रास्ता आसान कर देंगे। तिरंगे के लिए हम जान भी कुर्बान कर देंगे। नफीस देवबंदी ने अपने शायर पढ़ते हुए में यूं कहा कि मोहब्बत के चरागों जला देना जरूरी हैं, जमाने से अंधेरो का मिटा देना जरूरी हैं।
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शनिवार शाम वीवी इंटर कालेज में आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ समाज सेवी अनुज बंसल, राशिद अली चौहान और नायर कुरैशी ने दीप प्रज्वलित करके किया। डॉ. आबिद सैफी, महबूब राणा ने किया। प्रदीप मायूस ने प्रसिद्ध कवि गोपाल दास नीरज को समर्पित कविता में यूं कहा कि - चला जाऊंगा मैं दुनिया से जिस दिन, बहुत रोया करोंगे याद करके। जुनेद अख्तर कांधलवी ने कहा कि जैसे बनता नही अफसाना हकीकत के बगेर, जिंदगी यूं ही अधूरी है मोहब्बत के बगैर। नफीस देवबंदी ने अपने शायर में कहा कि मोहब्बत के चरागों जला देना जरूरी है। वसीम झिंझानवी ने कहा कि हिंदु-मुस्लिम का दुलारा लगता हमको तिरंगा, जान से प्यारा लगता है। मैंकर पानीपती ने अपने यू कहा कि मंदिर भी महफूज रहे, और मस्जिद भी मिसमार न हो। धर्मों मजहब के मुद्दों पर आपस में तकरार ना हो। अरशद जिया ने कहा कि जिनकी हुकूमतें रही, सारे जहान में, उनके ही तज करे न मिले दास्तान मैं। नवीन नीर ने काव्य पाठ किया। अध्यक्षता नयर कुरैशी ने किया। संचालन फरीद कुरैशी दिल्ली ने किया।
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