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तंगहाली की मार में बचपन पर कचरे का बोझ

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शामली।
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पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिवस को हर ओर बाल दिवस के रूप में मनाया गया। स्कूलों में कार्यक्रम हुए, तो बच्चों को बाल दिवस की महत्ता बताई गई, मगर कचरा एकत्र करते उन मासूमों की किसी को चिंता नहीं हुई, जो पेट की खातिर दिन भर कचरे में जिंदगी बिता रहे हैं।
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मंगलवार को शहर के गऊशाला रोड पर यही स्थिति देखने को मिली। 8 से 10 साल की उम्र के दो मासूम सड़क से कचरा इकट्ठा करने के बाद बोरी और कट्टे में भरने के बाद रिक्शा में लाद रहे थे। जब रिक्शा में कचरे की बोरियां लद गई, तो उसे खींचकर ले जाने लगे। बच्चों का कहना था कि इसी कचरे को बेचकर वह अपने लिए रोटी का इंतजाम करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार की योजनाओं का लाभ आखिर इन हालातों में जीवन जीने वाले मासूमों को क्यों नहीं मिल पाता है। क्यों इन्हें अपने दिन की शुरुआत कचरा बीनकर करनी पड़ती है और शाम भी कचरे के बीच हो जाती है।
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