गांव खेड़ीकरमू निवासी जितेंद्र तोमर की कई करोड़ रुपये की संपत्ति अब सरकारी हो गई है। जितेंद्र की हत्या कर दी गई थी, जिसमें उसकी पत्नी और बेटे को आरोपी बनाया गया था। हत्या से पूर्व ही जितेंद्र ने अपनी संपत्ति सरकार को देने की वसीयत कर रखी थी, जिस पर तहसीलदार शामली की न्यायालय में वाद चल रहा था। दो दिन पूर्व ही न्यायालय ने आदेश सुनाते हुए जितेंद्र की संपत्ति प्रदेश सरकार द्वारा डीएम शामली के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है।
शासकीय अधिवक्ता सोमपाल सिंह चौहान ने बताया कि 19 जनवरी 2016 को ग्राम खेड़ीकरमू निवासी जितेंद्र सिंह द्वारा उपनिबंधक चतुर्थ मेरठ के यहां अधिवक्ता अमरपाल सिंह और दो गवाहों की मौजूदगी में वसीयत की थी, जिसमें उन्होंने अपने बेटे अमित तोमर और पत्नी मालती व्यवहार ठीक न होने का उल्लेख करते हुए अपने बैंक अकाउंट छोड़कर समस्त चल अचल संपत्ति की वसीयत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा डीएम शामली के हक में की गई थी। इसको लेकर जितेंद्र सिंह के बेटे अमित तोमर ने तहसीलदार न्यायालय में आपत्ति दायर कर कहा था कि उसके पिता ने कोई वसीयत नहीं की है। 22 जुलाई 2016 को तहसीलदार शामली के न्यायालय में उत्तर प्रदेश सरकार बनाम सीमा आदि वाद दायर किया गया था। जिसमें वादी ने जितेंद्र निवासी खेड़ीकरमू द्वारा बैक एकाऊंट छोड़कर अन्य सभी चल अचल संपत्ति की वसीयत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा डीएम शामली के हक में अनुरोध किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान वसीयत लेखक अधिवक्ता अमरपाल सिंह, विशाल कुमार तायल, निबंधन लिपिक मेरठ सदर, गवाह राजू चौधरी व रोबिन सिंह तथा उपनिबंधक चतुर्थ मेरठ के बयान दर्ज किए गए, जिन्होंने जितेंद्र सिंह द्वारा वसीयत करने की पुष्टि की। पक्ष एंव विपक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद तहसीलदार शामली राकेश त्यागी ने जितेंद्र सिंह की संपत्ति से जितेंद्र सिंह का नाम निरस्त करने के बाद गत 19 जनवरी 2016 की वसीयत के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा डीएम शामली के नाम दर्ज कर दिया है।
शामली, गाजियाबाद और नोएडा में है संपत्ति
जितेंद्र सिंह के नाम कई करोड़ रुपये की संपत्ति थी, जिसमें खेड़ीकरमू में कृषि भूमि, बाग तथा गाजियाबाद के राजनगर में मकान और दुकानें हैं, जिसकी कीमत 80 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। वसीयत में जितेंद्र सिंह ने लिखा था कि उसका बेटा अमित तोमर दुर्व्यवहार करता है तथा उसकी बेटी और बहनोई के साथ भी अच्छा आचरण नहीं किया जाता है। अमित को उसकी मां मालती भी समर्थन करती है, जिसके चलते अमित उसकी संपत्ति को खुर्द बुर्द करने पर आमादा है। इसी कारण उसने मृत्यु के बाद अपनी समस्त संपत्ति पुत्र को नहीं देना चाहता था। बाद में जब जितेंद्र की हत्या हो गई, तो उसमें जितेंद्र की बेटी सीमा की तरफ से अमित और अपनी मां मालती के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।