दयाल आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में बाबा कीमती लाल ने कहा सुख-दुख मनुष्य के जीवन के दो पहलू है( सुख हो या दुख मनुष्य को परमात्मा को हमेशा याद रखना चाहिए।
जब दुख के समय सगे-संबंधी साथ छोड़ जाते है, उस समय परमात्मा ही साथ होता है। इसलिए मनुष्य को कथा, सत्संग श्रवण कर आचरण में लाना चाहिए। आचरण में लाने से, मन को शांति के साथ मन का अंधकार दूर हो जाता है। मन प्रकाशवान होता है, यही प्रकाश मोक्ष का द्वार बनता है। इस वर्ष श्रावण मास में पांच सोमवार है यह संयोग है। श्रावण मास की शुरुआत व अंत भी सोमवार को ही हो रहा है ऐसा दशकों बाद हो रहा है। श्रावण मास में भोले शंकर का जलाभिषेक करने के महत्व व लाभों के विषय में विस्तार से बताया। मौके पर यशपाल नारंग, विजय नारंग, अशोक महता, पप्पू, सुरेंद्र गर्ग, नत्थू सैनी, अशोक गुप्ता, रवि कुमार आदि मौजूद रहे।