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शव रेत में दबाकर जिंदा होने की लगाई आस: लोहे के गेट में उतरे करंट से युवक की मौत, दो घंटे रेत में दबाई लाश

Sat, 29 Aug 2026 09:41 PM IST
Akash Dubey संवाद न्यूज एजेंसी, खुटार (शाहजहांपुर)

सार

पश्चिमी गढ़ी में शनिवार दोपहर लोहे का दरवाजा खोलते समय डब्लू मिश्रा (30) की करंट लगने से मौत हो गई। भाई कमल भी झुलसे। परिजनों ने 2 घंटे तक शव रेत में दबाए रखा।
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शव रेत में दबाया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नगर के मोहल्ला पश्चिमी गढ़ी में शनिवार दोपहर मकान के लोहे का दरवाजा खोलते समय करंट लगने से डब्लू उर्फ डीके मिश्रा (30) की मौत हो गई। उन्हें बचाने पहुंचे भाई कमल मिश्रा भी करंट की चपेट में आकर मामूली रूप से झुलस गए। सीएचसी में चिकित्सक ने डब्लू को मृत घोषित कर दिया। जिंदा होने की आस में परिजन दो घंटे तक उनका शव रेत में दबाए रहे। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया।

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परिजनों के अनुसार, घर के मुख्य गेट पर लोहे का दरवाजा लगा है। इसके ऊपर से बिजली की केबल निकली है, जो क्षतिग्रस्त होने के कारण दरवाजे से छू गई थी। इससे गेट में करंट उतर आया था। शनिवार दोपहर मोहल्ले से घर लौटे डब्लू ने जैसे ही दरवाजा खोला, वह करंट की चपेट में आ गए।

घर में मौजूद भाई कमल ने उन्हें छटपटाते देखा तो बचाने के लिए दौड़े। डब्लू को खींचने के दौरान कमल भी झुलस गए। परिजन डब्लू को तत्काल सीएचसी लेकर पहुंचे, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों का कहना है कि सीएचसी के बाद वे उन्हें नगर के निजी अस्पतालों में भी लेकर गए, लेकिन वहां भी मृत घोषित कर दिया गया। शरीर गर्म होने के कारण जिंदा होने की उम्मीद में परिजनों ने उन्हें एक बिल्डिंग मटेरियल की दुकान पर रेत में दबाए रखा। 

करीब दो घंटे बाद उन्हें शाहजहांपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां भी चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शाम करीब पांच बजे शव घर लाया गया। कमल मिश्रा ने बताया कि डब्लू हल्द्वानी में पत्नी नीरज देवी के साथ रहकर नौकरी करते थे। वह रक्षाबंधन पर दो दिन पहले ही घर आए थे। उनका दस माह का बेटा देवांश है। परिजनों ने पुलिस को सूचना नहीं दी है। सीओ प्रवीण मलिक ने बताया कि पुलिस को सूचना नहीं दी गई है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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मनौती के बाद हुआ था बेटा, दस महीने में उठा पिता का साया
कमल मिश्रा ने बताया कि डब्लू की शादी 13 वर्ष पूर्व हुई थी। शादी के बाद से वह अपनी पत्नी नीरज देवी के साथ उत्तराखंड के हल्द्वानी में रहकर नौकरी करता था। परिजनों ने बताया कि वह संतान नहीं होने के कारण परेशान रहता था और काफी मनौती के बाद दस माह पूर्व बेटे देवांश का जन्म हुआ था। इससे वह खुश रहने लगा था। शुक्रवार को बहन बबली और किरण ने उसे राखी बांधी थी। अगले ही दिन उसकी मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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