मार्च में पूर्ण बहुमत से सूबे की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था में सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के साथ ही सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की घोषणा की थी। यही नहीं, शपथ ग्रहण के तुरंत बाद अवैध बूचड़खानों पर ताला लगा देने का वादा किया था, लेकिन समय की कसौटी पर यह सारी घोषणाएं खोखली साबित हुई हैं। योगी सरकार के 100 दिन का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद न तो गोवंशीय पशुओं का वध रुका और न ही अन्य सेवाएं सुधर सकीं। जिले में कई सड़कें आज भी जर्जर स्थिति में हैं। उन्हें गड्ढा मुक्त नहीं किया जा सका है। सरकार के चुनावी वादों और घोषणाओं के अनुरूप आधी-अधूरी उपलब्धियाें पर डालते हैं एक नजर।
100 दिन की क्राइम रिपोर्ट
हत्या-10
लूट-20
चोरी-52
चेन स्नैचिंग-01
गोवध-10
तेजाब फेंकने के मामले-02
रेप-25
छेड़छाड़-32
नियत समय के बाद भी गड्ढामुक्त नहीं हुईं सड़कें
सूबे की सभी सड़कों को 15 जून तक गड्ढा मुक्त करने का निर्णय लिया गया था। इसके तहत जिले मेें विभिन्न विभागों की 1540 किमी लंबी सड़कें गड्ढे पाटने के लिए चिन्हित की गईं। काम की शुरुआत में ठेकेदारों ने रेता, बजरी, कोलतार की ट्रांसपोर्ट दरें बढ़ने के कारण हाथ खींचे। बाद में जैसे-तैसे सड़कें संवारने का काम शुरू हुआ, लेकिन नियत समय सीमा तक बमुश्किल 80 फीसदी काम हो सका। शहर में खिरनीबाग, कचहरी के पास फोटोस्टेट मार्केट वाली रोड और पुवायां में बंडा रोड का हाल जैसा पहले था, वैसा ही आज है।
भीषण गर्मी में खराब पड़े हैं सैकड़ों हैंडपंप
लंबे अरसे से खराब पड़े हैंडपंप अभी तक सुधारे नहीं जा सके। जिला योजना की बैठक में जल निगम के एक्सईएन ने प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी के समक्ष स्वीकार किया था कि जिले में 40064 हैंडपंपों में से 2666 खराब हैं, जबकि हकीकत में 20 फीसदी से अधिक हैंडपंप खराब हैं। प्रभारी मंत्री ने ग्राम पंचायतों के बजट से खराब हैंडपंपों को रीबोर कराने के निर्देश दिए, लेकिन प्रधानों ने धनराशि जल निगम को धनराशि देने से इन्कार कर दिया।
18 घंटे बिजली सप्लाई भी बनी सपना
जिला मुख्यालय को 24 घंटे, छोटे शहरों को 22 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र को 18 घंटे बिजली सप्लाई देने की बात कही गई, लेकिन यह घोषणा भी हवा हवाई ही साबित हुई। भीषण गर्मी में ओवरलोडिंग से शहरी क्षेत्रों में ट्रिपिंग की समस्या बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बमुश्किल छह से आठ घंटे बिजली सप्लाई मिल रही है। जलालाबाद में तो भाजपा नेता ही ग्रामीणों के साथ बिजली कटौती के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। इसके बाद भी सुधार नहीं हो रहा है। पुवायां, तिलहर तहसील मुख्यालयों पर लाइन फाल्ट बिजली आपूर्ति पर हावी हैं।
सीएचसी-पीएचसी बन गए रेफर सेंटर
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने का वादा किया, लेकिन हुआ उल्टा। सरकारी अस्पतालों में धड़ल्लेे से बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। यही नहीं, सीएचसी और पीएचसी पर मरीजों को भर्ती करने की सुविधा होेने के बावजूद उन्हें किसी न किसी बहाने हॉयर सेंटर पर रेफर कर दिया जाता है। बीते दिनों भाजपा विधायक रोशन लाल ने जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर कड़ी नाराजगी भी जताई थी।
कर्ज माफी से भी वंचित हैं किसान
भाजपा ने सूबे में सरकार बनने पर किसानों के सारे कृषि ऋण माफ करने की घोषणा की थी। सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री ने चुनावी वादे से पलटते हुए एक लाख रुपये तक के कर्ज माफ करने की बात कहीं। जिले में लघु-सीमांत श्रेणी के 1.15 लाख कर्जदार किसान चिन्हित किए गए। इन किसानों के गत वित्त वर्ष से पहले के 900 करोड़ रुपये माफ होेने हैं, लेकिन प्रशासन और बैंक अफसरों को अभी तक इस बारे में सरकार से कोई गाइड लाइन नहीं मिलने से किसानों को एक नए पैसे की वित्तीय राहत नहीं मिल सकी है।
नहीं बंद हुई पशु तस्करी, घरों में कट रहे जानवर
जिले में जलालाबाद और कटरा के स्लाटर हाउस पहले से बंद थे। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद मुख्यालय पर ककरा कलां में मानकों के विपरीत चलाया जा रहा स्लाटर हाउस बंद कर दिया गया तो घरों में पशुओं को काटा जाने लगा। आए दिन शहर की सड़कों पर मांस पकड़े जाने के बावजूद प्रशासन और पुलिस के अधिकारी यह जानने में दिलचस्पी नहीं ले रहे कि पशु मांस कहां से लाया जा रहा है। पशुओं की तस्करी भी नहीं रुक पा रही है।
एंटी रोमियो स्क्वॉयड भी बेअसर
महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एंटी रोमियो स्क्वॉयड टीम का गठन किया था, कुछ दिनों तक तो यह टीम काम करती नजर आई, लेकिन अब यह टीम कहीं नजर नहीं आती, इसी का नतीजा है कि महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और दुराचार की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।