तिलहर। सभी आसनों में सबसे अनोखा आसन ‘पादहस्तासन’ है। पादहस्तासन पद और हस्त दो शब्दों के मेल से बना है। इसमें पद शब्द का अर्थ होता है ‘पैर’ और हस्त शब्द का मतलब ‘हाथ’। ये आसन खड़े-खड़े करना पड़ता है, जिसके कारण बहुत कम लोग ये आसन कर पाते है। इस आसन को करने की विधि व जानकारी दे रहे हैं योगाचार्य अखंड प्रताप शर्मा उर्फ रानू परमार्थी। संवाद
विधि-
- सबसे पहले आसन पर दोनों पैरों की एड़ी और पंजे मिलाकर तथा दोनों हाथ जांघों से सटाकर सीधे खड़े हो जाएं।
- श्वांस भरकर दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए बाजू कानों से सटा लें हथेलियां सामने की ओर रखते हुए कमर का हल्का सा पीछे की ओर झुकाव दें।
- श्वांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुके बाजू कानों से लगी रहें। आगे झुकते समय धड़ एकदम सीधा रहे मेरुदंड में कर्व (गोलाई) न आने दें, घुटने सीधे व तने रहें।
- अपनी दोनों हथेलियों को पैर के पंजों के साथ जमीन के समतल रखें। अपना माथा धीरे-धीरे घुटनों से अथवा उससे नीचे पैरों से लगा दें। सांसों की गति सामान्य चलने दें।
- वापस आते समय श्वांस भर कर पुन: बाजू कानों से लगाकर एवं धड़ को सीधा रखते हुए ऊपर की ओर खिंचाव देकर वापस आसन की अवस्था में आ जाएं ।
- 3 से 5 आवृत्ति करें। सामर्थ्य अनुसार 15 सेकंड से लेकर 3 मिनट तक आसन की स्थिति में रुका जा सकता है।
लाभ
मेरुदंड को लचीला बनाता है। जठराग्नि प्रदीप्त करता है। कब्ज तथा मासिक धर्म संबंधित रोगों से बचाता है। जिगर और गुर्दों के बेहतर कार्य पद्धति में मदद करता है। मस्तिष्क को शांत करता है।
सावधानी
कमर दर्द, स्लिप डिस्क, सियाटिका के रोगी अथवा पीठ में चोट लगी हो तो इसका अभ्यास न करें। खड़े होकर किए जाने वाला यह एक कठिन आसन है। प्रारंभिक अवस्था में सामान्य रूप से जितना झुक सकते हैं झुकें। शरीर के साथ जबरदस्ती न करें।
कोरोना से लड़ाई जीतकर फिर ड्यूटी पर आ डटे
राजकीय मेडिकल कॉलेज में तैनात फार्मासिस्ट संदीप कुमार गुप्ता 29 मई को कोरोना संक्रमित हो गए थे। उनकी ड्यूटी ट्रॉमा सेंटर में चल रही थी। हालत बिगड़ने पर उन्हें भर्ती भी करना पड़ा था। इसके बाद अस्पताल कैंपस में बने उनके सरकारी आवास में उन्हें क्वारंटीन करा दिया गया। उनकी पत्नी बबिता गुप्ता, बेटे नवदीप गुप्ता और संकल्प भी संक्रमित हो गए। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। सभी ने एक-दूसरे का ख्याल रखा। 11 जून को दोबारा जांच होने पर संदीप की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई। घर पर रहकर आराम करने के बजाए उन्होंने अगले दिन 12 जून को ड्यूटी ज्वाइन कर ली। संदीप कहते हैं कि कोरोना से हम सभी को मिलकर जंग जीतनी है। हिम्मत न हारें बल्कि डटकर इसका सामना करें। संवाद