फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व योग दिवस पर विशेष : योग से बढ़ाई शारीरिक क्षमता, पाया रोगों का निदान

विज्ञापन
शाहजहांपुर में योग का अभ्यास करते लोग का । फाइल फोटो - फोटो : SHAHJAHANPUR
विज्ञापन
शाहजहांपुर। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। योग प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है। वर्तमान में लोगों का रुझान योग की ओर काफी बढ़ा है। कोरोना काल में भी लोगों को अच्छी सेहत का महत्व समझ में आ गया। यही वजह है कि लोग विशेषज्ञों के साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से योग सीख रहे हैं। तमाम लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने योग के माध्यम से तमाम असाध्य बीमारियों का हल पाया है।
विज्ञापन

योग के अभ्यास से कोरोना को हराया
मई में अपने मेडिकल स्टोर पर कार्य करते समय कोरोना पॉजिटिव हो गया था। इस दौरान होम आइसोलेशन में लगभग 25 दिन रहा। काफी कमजोरी आ गई थी। श्वसन तंत्र में भी काफी परेशानी हो गई। एलोपैथ का इलाज लगातार चलता रहा। तिलहर से लेकर बरेली तक डॉक्टरों को दिखाया। इस दौरान मैंने योग का सहारा लिया। सुबह और शाम अपने कमरे में ही मैं अनुलोम विलोम, भस्त्रिका प्राणायाम, कपालभाति के साथ ही मत्स्यासन का नियमित अभ्यास किया। आसन और प्राणायाम करने से जहां एक और शारीरिक दुर्बलता धीरे-धीरे ठीक हुई वहीं श्वसन तंत्र में भी बहुत आराम मिला। अब काफी बेहतर महसूस कर रहा हूं।
-अरुण रस्तोगी, मोहल्ला पक्का कटरा, तिलहर
-
योग जीवन का अनिवार्य हिस्सा
मैं गुरुकुल का छात्र रहा हूं। गुरुकुल में प्रारंभ से ही योग की शिक्षा दी जाती है। मानव जीवन में उतार-चढ़ाव लगे रहते हैं मेरे शरीर में भी प्रारंभिक दौर में कुछ व्याधियां रहीं। मैंने योग और प्राणायाम से अपनी सारे शारीरिक कष्टों का निवारण कर लिया। मैं 23 वर्ष का हूं। मैंने योग और प्राणायाम को अपने जीवन के नित्य कर्म में शामिल कर लिया है। योग को बढ़ावा देना केंद्र सरकार के सबसे अच्छे फैसलों में से है। योग और प्राणायाम से मेरे जीवन में काफी बदलाव है। मैं गुरुकुल के छात्रों को भी योग और प्राणायाम की शिक्षा देता हूं। योग से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और व्यक्ति हमेशा स्वस्थ रहता है।
विज्ञापन

-अनुभव आर्य, कन्या गुरुकुल रुद्रपुर के संचालक
-
योग से दूर की फेफड़ों की दुर्बलता
पेशे से मैं दंत चिकित्सक हूं। कोरोना पॉजिटिव आने के बाद मैं होम क्वारंटीन रहा। इस दौरान एलोपैथिक दवाइयां लेकर शरीर काफी कमजोर हो गया और फेफड़ों में भी दुर्बलता आ गई। इस दौरान योगाचार्य की सलाह पर मैंने प्रतिदिन सुबह और शाम योग और प्राणायाम करना प्रारंभ कर दिया। 20 दिन में ही मेरे फेफड़ों की दुर्बलता दूर हो गई। अब मैं अपने को काफी स्वस्थ महसूस करने लगा हूं। शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए कोणासन, मत्स्यासन और हलासन करता हूं। मैंने प्राणायाम और आसन को अपने जीवन का अंग बना लिया है। मेरा सभी लोगों से अनुरोध है कि योग और प्राणायाम को नियमित करें जिससे स्वास्थ्य ठीक रह सके।
-डॉ. यशवंत कुमार मैथिल
-
योग से ठीक कर लिया रीढ़ का दर्द
लंबे अरसे से रीढ़ के दर्द से परेशान था। बरेली से लेकर दिल्ली तक कई स्थानों पर लंबे अरसे तक इलाज कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। डॉक्टर ने आराम की सलाह दी। व्यापार भी प्रभावित हो रहा था। तभी योगाचार्य ने योग करने की सलाह दी। उनके दिशा-निर्देश के अनुसार प्राणायाम और योगासन करना शुरू किया। धीरे-धीरे लाभ मिलना प्रारंभ हो गया। अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, प्राणायाम के साथ शलभासन और भुजंगासन नियमित रूप से करता रहा और आज भी करता हूं। ऐसा करने से मुझे दर्द होना बंद हो गया। बहुत लाभ हुआ है। योग हमारी प्राचीन परंपरा है। स्वस्थ रहने के लिए सभी को योग का सहारा लेना चाहिए।
-विनीत गुप्ता, दातागंज, तिलहर
-
योग को बना लिया कॅरियर
योगाचार्य अखंड प्रताप शर्मा उर्फ रानू परमार्थी ने योग को कॅरियर के रूप में अपनाया। तिलहर मोहल्ला भक्सी में रहने वाले योगाचार्य अखंड प्रताप शर्मा उर्फ रानू परमार्थी ने बताया कि 2008 में योग ऋषि स्वामी रामदेव के संपर्क में आए। 2015 में पतंजलि से जिला योग प्रचारक के रूप में नियुक्ति की गई। व्यायाम शिक्षक के रूप में पूर्व माध्यमिक विद्यालय तिलोकपुर में अनुदेशक व्यायाम शिक्षक के रूप में वर्ष 2013 में तैनात हैं। जनपद के सैकड़ों गांवों तथा विद्यालयों में हजारों लोगों को निशुल्क योग सिखा चुके हैं।
-
30 साल से योग का प्रचार-प्रसार कर रहे डॉ. अवधेशमणि
आयुर्वेद डॉक्टर और योगाचार्य डॉ. अवधेश मणि त्रिपाठी पिछले 30 सालों से लोगों को योग का अभ्यास करा रहे हैं। कैंट क्षेत्र में सैनिकों को भी योग सिखाते हैं। कुमायूं, राजपूत बटालियन के सैनिक उनसे योग का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। डॉ. अवधेशमणि त्रिपाठी बताते हैं कि योग हमारे तन-मन के साथ ही प्राण ऊर्जा को भी सुरक्षित और संरक्षित करता है। कोरोना काल में तो इसका खासा महत्व है। योग के अभ्यास से शरीर के सभी अंगों को मजबूत किया जाता है। ऐसे में वायरस का हमला हमारे शरीर को न्यूनतम प्रभावित कर सकता है। हर व्यक्ति को योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा अवश्य बनाना चाहिए। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें