पुवायां के पन्नघाट पर यज्ञ में आहुतियां देते श्रद्धालु। संवाद
पुवायां। गोमती नदी के पन्नघाट पर चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ में यज्ञाचार्य मंगूलाल शुक्ला ने यज्ञ की महिमा का बखान किया।
यज्ञाचार्य ने कहा कि वेदों में यज्ञ और दान को जीवन के स्तंभ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यज्ञ हमें स्वार्थ से परे जाकर ब्रह्मांडीय शक्तियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर देता है, जबकि दान हमें निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करने की प्रेरणा देता है। दोनों कर्म व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाने और समाज में नैतिकता और मानवता का प्रसार करने का साधन है। इसलिए दान और यज्ञ का संयोजन व्यक्ति और समाज के विकास के लिए अति आवश्यक है।
रुद्र देवानंद महाराज ने बताया कि 11 से 16 फरवरी तक पूजन, पाठ, यज्ञ दिन में दस बजे से होगा। 17 फरवरी को पूर्णाहुति के बाद कन्या भोज और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। 11 से 16 फरवरी तक रोजाना दोपहर दो से पांच और रात आठ से 11 बजे तक श्रीरामकथा होगी। संवाद
विनम्रता और मर्यादा में होता है सच्चा बल : अरविंद
खुटार। गांव चांदपुर में चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ और श्री रामकथा में कथा व्यास अरविंद दीक्षित ने सीता स्वयंवर की कथा सुनाते हुए कहा कि विनम्रता और मर्यादा में सच्चा बल होता है। कथा व्यास ने कहा कि शिव धनुष तोड़ने के लिए कई राजाओं ने प्रयास किया लेकिन धनुष को हिला तक न सके। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम ने धनुष तोड़ दिया। उनका तेज, विनम्रता और दिव्य आभा देखकर पूरी सभा शांत हो गई। धनुष टूटने पर देवताओं ने पुष्प वर्षा की और पूरी सभा आनंद से भर उठी। इसके बाद सीता का श्रीराम से विवाह हुआ। कथा के बाद आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। इससे पूर्व तमाम लोगों ने यज्ञ स्थल की परिक्रमा की और यज्ञ में आहुतियां दीं। संवाद