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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष : अंधाधुंध कटान से बदल रहा जंगलों का आकार, गायब हो रहे वन्य पशु

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कोरो की बेशकीमती लकड़ी को ईंधन के रूप में काट कर ले जाते युवक - फोटो : POWAYAN
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पुवायां / शाहजहांपुर। तमाम सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के प्रयासों और जागरूकता अभियानों के बावजूद ग्लोबल वार्मिंग लगातार बढ़ती जा रही है। जंगलों और बागों का अंधाधुंध कटान, नदियों के तटों पर हो रहे अवैध कब्जे इसका मुख्य कारण है।
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कुछ वर्ष पूर्व तक वनों से पूरी तरह आच्छादित पुवायां तहसील क्षेत्र में जंगलों का अंधाधुंध कटान होने के चलते कई प्रकार के पेड़ और वन्य पशु प्राय: विलुप्त हो चुके हैं। पुवायां क्षेत्र पर्यावरण के प्रति बेहद संवेदनशील और पशु प्रेमी के रूप में विख्यात केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का संसदीय क्षेत्र भी रह चुका है। उन्होंने वनों और वन्य पशुओं की सुरक्षा के लिए गंभीरता भी दिखाई, लेकिन इसके बाद भी निरीह वन्य पशुओं का वध और बेशकीमती सागौन और कोरो के पेड़ो का कटान नहीं रुक सका है। क्षेत्र के कुछ प्रभावशाली किसान समीपवर्ती जंगलों का कटान कर अपने कृषि फार्मों का विस्तार करने में लगे हुए हैं। इससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुंच रही है।
शाहजहांपुर में करीब साढ़े छह हजार हेक्टेयर वन भूमि हैं और कुल पांच रेंज हैं। इसमें अकेले खुटार रेंज का वन्य क्षेत्र करीब छह हजार हेक्टेयर है। अब हालत यह हो चले हैं कि जंगल में केवल सागौन और कोरों के पेड़ ही रहे गए हैं। जंगल से रोजाना भारी कटान कर बेशकीमती लकड़ी को ईंधन के रूप में बेचा जा रहा है। ऐसे में जंगल बाग के रूप में तब्दील होकर रह गए हैं।
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ईंधन के रूप में बिकती है बेहद कीमती लकड़ी
पुवायां। सागौन और कोरों की लकड़ी बेहद कीमती होती है और इमारतों में इसका प्रयोग किया जाता है, लेकिन खुटार रेंज में कोरों और सागौन के पेड़ काट कर ईंधन के रूप में बेच दिए जाते हैं। खुटार का मोहल्ला रायटोला, देवस्थान, बगियानाथ, नरायनपुर, बजरिया, कोट में तो तमाम लोग लकड़ी का धंधा करते हैं।
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नर्सरी में खड़ी है घास
खुटार। वन विभाग नर्सरी और जंगलों के प्रति कितना गंभीर है, इसका अंदाजा खुटार रेंज की फत्तेपुर बीट की नर्सरी से लगाया जा सकता है। यहां नर्सरी में पौधों के स्थान पर घास खड़ी हुई है। जंगलों में पौध लगाने के बाद देखरेख नहीं की जाती है, जिससे तमाम पौधे सूख जाते हैं और तमाम पौधों को पशु खा जाते हैं।
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वन संपदा की सुरक्षा पर पूरा ध्यान दिया जाता है। लोगों से भी अपील की जाती है कि वह पौधों को लगाएं और उनका पूरा ध्यान रखें, जिससे पर्यावरण संरक्षण हो सके।
-डीएस यादव, रेंजर खुटार
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जुलाई में लगेंगे 48.77 लाख पौधे
शाहजहांपुर। जनपद में वर्षाकाल के दौरान जुलाई में 48.77 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। इसमें वन विभाग की ओर से लगभग 14 लाख एवं अन्य 27 सरकारी विभागों की ओर 34 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा।
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वन विभाग का 97 तो अन्य विभागों का सर्वाइवल रेट 76 प्रतिशत रहा
डीएफओ आदर्श कुमार के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2020-21 में कुल 43 लाख पौधों का रोपण किया गया था। जिसमें वन विभाग की ओर से लगभग 15 लाख पौधे रोपित किए गए थे। अन्य विभागों की ओर से करीब 28 लाख पौधों का रोपण किया गया था। सभी विभागों से एवं जांच के दौरान प्राप्त जानकारी के अनुसार वन विभाग का सर्वाइवल रेट 97 प्रतिशत एवं अन्य विभागों का 76 प्रतिशत रहा है।
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रोपे जाएंगे विलुप्त हो रही प्रजातियों के पौधे
डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया कि इस बार कुछ विलुप्त हो रही प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा। उक्त पौधे वन विभाग की नर्सरियों पर तैयार करा दिए गए हैं। इनमें महुआ, देशी आम, कैथा खिरनी, घात, बड़ी जामुन, बेल, बहेड़ा, बालम खीरा आदि शामिल हैं।
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5400 हेक्टेयर वन भूमि, 900 हेक्टेयर पर कब्जा
जनपद में वन विभाग की खुटार रेंज के अंतर्गत 5400 में रिजर्व वन भूमि है। इसमें से 900 हेक्टेयर भूमि पर अभी अवैध कब्जा बरकरार है। डीएफओ ने बताया कि यह कब्जा वर्ष 1970 से पहले का है। कब्जा मुक्त कराने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विगत वर्ष 30 हेक्टेयर भूमि को कब्जा मुक्त कराया जा चुका है। जिसमें पौधरोपण करा दिया गया है। अन्य भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। संवाद
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