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जब जीना हुआ मुहाल तब घर वापसी का लिया फैसला, पुलिस की पिटाई भी झेली

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शाहजहांपुर। चलते-चलते पांव में छाले पड़ गए लेकिन अब तक मंजिल भी नहीं मिल पाई। हाईवे से गुजर रहे प्रवासी मजदूरों का यह दर्द जुबां पर आ गया। हरदोई बाईपास चौराहे पर जब चलते चलते थकान महसूस होने लगी तो वे सड़कों पर ही बैठ कर सुस्ताने लगे। भूख प्यास से बेहाल इन मजदूरों ने आप बीती बताई तो हर किसी का मन सिहर उठा। चौराहे पर ड्यूटी पर तैनात दरोगा ने कुछ मजदूरों को पास ही में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए रेयान स्कूल में भेज दिया। यहां से उन्हें खाना मिल गया।
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बुधवार को यहां हरदोई बाईपास चौराहे पर पैदल आ रहे हैं प्रवासी मजदूरों की काफी भीड़ देखने को मिली। लंबी दूरी पैदल ही तय करने के बाद मजदूरों के पांव में छाले तक पड़ गए हैं, लेकिन घर पहुंचने की आस उनके शारीरिक कष्टों पर भारी पड़ रही है। बुधवार को यहां मेरठ से पहुंचे प्रांत बिहार के जनपद मोतिहारी के थाना चकिया क्षेत्र के गांव वारा गोविंद निवासी सुरेंद्र राय ने बताया कि वह और उनके साथी मदन निवासी कल्यानपुर जनपद मोतिहारी प्रांत बिहार, दलबीर शाह कल्यानपुर जनपद मोतिहारी प्रांत बिहार, बैजनाथ शाह थाना सुगौली जनपद मोतिहारी प्रांत बिहार मेरठ में जेल चुंगी के पास रिक्शा चलाते थे। 25 मार्च से लगे लॉक डाउन के चलते उनका काम ठप पड़ गया। मेरठ में प्रशासन ने उनके खाने की व्यवस्था की। कई बार तो उन्हें भूखा भी सोना पड़ा। जब उनका रहना मुहाल होने लगा तो उन्होंने घर वापसी करने का फैसला कर लिया। तीन दिन तक कभी पैदल तो कभी कुछ किलोमीटर दूर तक पुलिस के सहयोग से सफर तय करने के बाद वो यहां पहुंचे हैं। कई स्थानों पर तो उन्हें पुलिस की पिटाई भी झेलनी पड़ी। अभी भी 700 किलोमीटर का सफर बाकी है। हरदोई बाईपास चौराहे पर मौजूद दरोगा सुरेश चंद्र ने चौराहे पर खड़े कुछ मजदूरों को एक पिकअप रुकवा कर बैठा कर रवाना कर दिया। इसके बावजूद भी मजदूरों का आना बदस्तूर जारी रहा।
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