अहोई अष्टमी पर पूजा करती व्रती महिला। स्रोत: जागरुक पाठक
शाहजहांपुर। अहोई अष्टमी पर सोमवार को महिलाओं ने संतान की रक्षा के लिए व्रत रखा। पूजा-अर्चना कर संतान की दीर्घायु व स्वस्थ रहने की कामना की। घरों में सामूहिक रूप से कथा का भी आयोजन किया गया।
श्री रुद्र बालाजी धाम के पुजारी पंडित कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि अहोई अष्टमी के दिन माता पार्वती की पूजा की जाती है। अहोई माता की पूजा करने के लिए अहोई माता का चित्र गेरुए रंग से बनाया जाता है। इस चित्र में माता अहोई और उनके सात पुत्रों को अंकित किया जाता है। उन्होंने बताया कि हर साल अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर किया जाता है।
यह व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद आता है। इस दिन माताएं अपनी संतान के स्वास्थ्य व उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए व्रत करती हैं। इस व्रत को निर्जला रखा जाता है और तारों को अर्घ्य देने के बाद पारण किया जाता है।