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Shahjahanpur News: आबादी तक वन्य पशुओं की घुसपैठ, जागरूकता तक सीमित वन विभाग

Sun, 29 Dec 2024 01:16 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
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खुटार के गांव सरेली के पास गन्ना भरते श्रमिक और रखवाली करता दूसरा श्रमिक। संवाद
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खुटार। क्षेत्र में आबादी तक वन्य पशु घुसपैठ कर रहे हैं। पिछले दो माह में 12 से ज्यादा छुट्टा पशुओं का बाघ और तेंदुआ शिकार कर चुके हैं। इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ जागरूकता तक सीमित हैं। वन्य पशुओं को जंगल की तरफ खदेड़ने के कोई प्रयास होते नहीं दिख रहे हैं।
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खुटार रेंज के जंगल लखीमपुर की किशनपुर सेंक्चुरी से जुड़ी है, जो दुधवा नेशनल पार्क में लगती है। इस कारण यहां बाघ और तेंदुआ अक्सर आ जाते हैं। निहालपुर, हिमंचलपुर, बेला, कोल्हूगाढ़ा, बुझिया के पास बाघ-तेंदुआ छुट्टा पशुओं को कई बार मार चुके हैं।
जंगलों में कटान के चलते झाड़ी और छोटे पेड़-पौधे नहीं रह गए हैं। इससे वन्य पशुओं के प्रवास में बाधा आ रही है। बाघ व तेंदुआ आदि के खेतों में आने का कारण ये भी है कि यहां छुट्टा पशुओं के रूप में शिकार भरपूर संख्या में मिल जाता है। संवाद
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निगरानी के लिए पर्याप्त वनकर्मी ही नहीं

खुटार रेंज का रकबा 56 सौ हेक्टेयर है। इसमें दस वीट उत्तर मैलानी, सिंहपुर उत्तरी, सिंहपुर पूर्वी, खुटार, नजीरगंज, मंडनपुर, बिलंदापुर, गंगसरा, नवदिया बंकी और बंडा शामिल है। इस बड़े वन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खुटार रेंज का कार्यालय लखीमपुर जनपद के मैलानी कस्बे में है। रेंजर और तमाम स्टाफ मैलानी में ही रहता है, जबकि वन क्षेत्र खुटार और बंडा में ज्यादा है। रेंज के जंगलों की सुरक्षा के लिए एक रेंजर तैनात है। डिप्टी रेंजर नहीं हैं। सात फारेस्टर के स्थान पर पांच और दस फारेस्ट गार्ड के स्थान पर पांच की तैनाती है। आठ न्यूनतम वेतनकर्मी तैनात हैं, जो काफी कम है।


मुकदमेबाजी में फंसी 300 हेक्टयर जमीन

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 1216.96, बदायूं में 58.62 और शाहजहांपुर में 956.87 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जा है। खुटार रेंज की लगभग 300 हेक्टेयर वन भूमि के मुकदमे न्यायालयाें में विचाराधीन हैं। यह जमीन भी लोगों के कब्जे में है। जंगल के आसपास के कुछ किसान पहले पेड़ काटकर ले जाते हैं। बाद में वन भूमि को खेतों में मिला लेते हैं। इससे रकबा लगातार घट रहा है।
रात में फसलों की नहीं हो पाती रखवाली
बाघ और तेंदुआ जैसे वन्य जीवों के खेतों और गांव तक आने से किसान और श्रमिक परेशान हैं। गन्ने की छिलाई में सबसे ज्यादा खतरा है। वन्य पशुओं के भय से किसान रात में फसल की रखवाली करने नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में छुट्टा पशु फसल चर जाते हैं। रखवाली करें तो वन्य पशुओं का खतरा रहता है। गन्ने की छिलाई में श्रमिक नहीं मिलते हैं। श्रमिक तैयार भी हों तो कुछ लोग काम करते हैं तो कुछ लाठी-डंडे लेकर वन्य पशुओं पर निगाह रखते हैं। शोरशराबा करते रहते हैं, इससे किसान का खर्च बढ़ गया है। किसान रामाधार तिवारी ने बताया कि मेरे खेतों के पास बाघ 15 दिन में दो सांड़ मार चुका है। गांव सरेली के श्रमिक कुलदीप ने बताया कि खेतों में काम करते वक्त डर लगता है।







उपलब्ध संसाधनों में वनकर्मी पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे हैं। वन्य पशु देखे जाने की सूचना मिलते ही जांच कराई जाती है। तमाम लोगों के खेत जंगल किनारे हैं, जहां वन्य पशु पहुंच जाते हैं और वापस जंगल में चले जाते हैं।



मनोज श्रीवास्तव, रेंजर खुटार

खुटार के गांव सरेली के पास गन्ना भरते श्रमिक और रखवाली करता दूसरा श्रमिक। संवाद

खुटार के गांव सरेली के पास गन्ना भरते श्रमिक और रखवाली करता दूसरा श्रमिक। संवाद

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