शाहजहांपुर। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत काफी कम संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से भरपूर प्रचार-प्रचार का दावा किया जा रहा है। बीएसए ने दिव्या गुप्ता ने अभिभावकों को योजना का लाभ उठाने की अपील की है।
शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत जिले के 836 निजी विद्यालयों की 25 प्रतिशत सीटों पर अगले सत्र में प्रवेश दिया जाएगा। प्री-प्राइमरी व कक्षा एक में प्रवेश के लिए प्रथम चरण में 19 दिसंबर तक कुल 365 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 341 आवेदन सही पाए गए, जबकि 24 आवेदन निरस्त हो गए। इसके बाद 24 दिसंबर को लाॅटरी निकाली गई। इसमें 195 बच्चों को 66 विद्यालय आवंटित किए गए।
इनमें माधवराव सिंधिया पब्लिक स्कूल, द मंसूरी इंटरनेशल स्कूल, तक्षशिला पब्लिक स्कूल व लीड कॉन्वेंट जैसे विद्यालय शामिल हैं। खाली सीटों के आधार पर अभी दो चरणों में आवेदन और लिए जाएंगे। जो लोग प्रथम चरण में आवेदन नहीं कर सके हैं, वे दूसरे चरण में आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही जिनके आवेदन पत्र निरस्त हो गए अथवा लॉटरी में नाम नहीं चयन नहीं हो पाया, वे भी अब द्वितीय चरण के तहत 19 जनवरी तक आवेदन कर सकेंगे।
बीएसए दिव्या गुप्ता ने बताया कि विभाग की ओर से विज्ञापन के साथ ही प्रपत्रों का वितरण आदि के माध्यम से भरपूर प्रचार-प्रचार करवाया गया है। इसके बावजूद इतनी कम संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। अपने बच्चों को बड़े स्कूलों में प्रवेश दिलाने के इच्छुक अभिभावकों को स्वयं ही आवेदन करना होगा। अपील की गई कि अधिक से अधिक आवेदन करें, जिससे योजना का लाभ मिल सके।
शैक्षिक सत्र 2024-25 में 974 बच्चों को मिला लाभ
आरटीई के तहत शैक्षिक सत्र 2024-25 में 2306 आवेदन हुए थे। इनमें से कुछ आधार, जन्म व निवास प्रमाण पत्र की अनुपलब्धता के कारण निरस्त हो गए थे। 1,111 को विद्यालय आवंटित किए गए। प्रवेश 974 छात्र-छात्राओं ने लिया। बताया जाता है कि शेष बच्चों के अभिभावकों ने अपनी पसंद का विद्यालय या फिर दो बच्चों का एक ही स्कूल में प्रवेश नहीं मिलने के कारण रुचि नहीं दिखाई।
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नामचीन विद्यालयों में अधिक , अन्य में खाली रह जाती हैं सीटें
- आरटीई के तहत अधिकतर आवेदन शहर के नामचीन विद्यालयों में ही बच्चों के प्रवेश के लिए आते हैं। इसकी वजह से कुछ ही विद्यालयों में प्रवेश के लिए ज्यादा आवेदन आ जाते हैं, जबकि प्रवेश के लिए सीटों की संख्या सीमित है। अन्य विद्यालयों में सीट खाली रहने के बाद भी उसके लिए कम लोग आवेदन करते हैं। इसकी वजह से वहां सीट खाली रह जाती है।