मूल्य समर्थन योजना के तहत जिले को शासन से मिले खरीद लक्ष्य के सापेक्ष 50 फीसदी खरीद करने में अफसरों को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। बिकवाल किसान नहीं मिलने से क्रय केंद्रों पर एक सप्ताह से सन्नाटा पसरा है और मंडियों की गल्ला आढ़तों पर भी गेहूं की आवक ठप हो गई है। खरीद सीजन खत्म होने को सिर्फ 15 दिन बाकी बचे हैं, लेकिन अभी तक बमुश्किल 41 प्रतिशत खरीद लक्ष्य पूरा हो सका है। जिले में इस बार 2.62 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की गई थी। यह रकबा गत वर्ष की तुलना में अधिक होने के आधार पर जिले में दस लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन होने की उम्मीद लगाई गई। पैदावार के इसी अनुमान के बूते गेहूं जिले को मूल्य समर्थन योजना के तहत 1.76 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया। इसी के साथ गत एक अप्रैल से विभिन्न क्रय एजेंसियों ने गेहूं की खरीद शुरू की। खरीद सत्र के शुरुआती दो सप्ताह क्रय केेंद्रों पर बारदाना और अन्य व्यवस्थाएं जुटाने में बीत गए। इस दौरान गेहूं में नमी ज्यादा होने से गल्ला आढ़तियों ने क्रय केंद्रों से लौटने वाले किसानों का गेहूं तौलना शुरू कर दिया। बगैर किसी झंझट के आढ़तों पर समर्थन मूल्य के समान गेहूं का पेमेंट मिलने से किसानों का रुझान क्रय केंद्रों के बजाय आढ़तों की ओर हो गया। नतीजा यह हुआ कि सेंट्रल पूल की इकलौती खरीद एजेंसी एफसीआई समेत स्टेट पूल की अन्य एजेंसियां खरीद में बुरी तरह पिछड़ गईं। यहां बताना प्रासंगिक होगा कि भारतीय खाद्य निगम ने 21 हजार मीट्रिक टन खरीद लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 5910.25 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है। इसी तरह स्टेट पूल की अन्य क्रय एजेंसियों ने 1.55 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष 67277.54 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद कर पाईं। खरीद लक्ष्य हासिल करने के लिए केंद्र प्रभारियों को गांवों का भ्रमण करके किसानों को अपना गेहूं क्रय केद्रों पर लाने को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अब गावों से गेहूं निकलकर बाहर नहीं आ रहा है।
किसानों को क्रय केंद्रों पर समर्थन मूल्य से अधिक भुगतान गल्ला आढ़तों पर मिल रहा है। इसीलिए सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की आवक लगभग बंद हो गई है। इसके बावजूद किसानों की सुविधा के लिए सभी क्रय केंद्र 30 जून तक प्रभावी रखे जाएंगे।
-आरपी सिंह, उप संभागीय विपणन अधिकारी