मंडलायुक्त पीवी जगमोहन शुक्रवार को बरेली से लखनऊ जाने के दौरान रोड साइड के खेतों का जायजा लिया तो कई जगहों पर नरई को जलते देखा। इस पर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों से कहा कि वह किसानों को जागरूक करें और नरई जलाने पर होने वाले नुकसान के बारे में अवगत कराएं।
मंडलायुक्त ने कहा कि किसान पंचायतों के जरिए कृषकों को बताए कि खेत में नरई जलाने से मिट्टी की 25 प्रतिशत उर्वरा शक्ति कम हो जाती है, यदि नरई में यूरिया डालकर पानी लगा दें तो अच्छी जैविक खाद तैयार हो जाती है। इसका लाभ आगे की फसल में मिलता है और जमीन उपजाऊ हो जाती है। नरई जलने से इलाके में प्रदूषण बढ़ता है, जिससे लोगों को स्वास्थ्य नुकसान भी होता है। उन्होंने बताया कि ताजा शोध से पता चला है कि नरई जलाना नुकसानदायक होता है। नागालैंड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नागालैंड में पहाड़ी वन जलाकर फिर फसल उगाते थे, इससे कुछ वर्षों में वहां की भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो गई। इस पर वहां के किसानों को जागरूक किया गया और अब वहां के लोग फसल अवशेष नहीं जलाते हैं। इस मौके पर सीडीओ टीके शिबु, एडीएम वित्त एवं राजस्व सर्वेश कुमार व कृषि विभाग के अधिकारी आदि मौजूद रहे।