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बारिश के साथ चली हवा से कच्चा मकान गिरा, ग्रामीण की मौत

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शाहजहांपुर/ निगोही। पिछले कई दिनों से हो रही उमस भरी गर्मी से लोग परेशान हैं। सोमवार को देहात के कई इलाकों में हल्की बारिश के साथ तेज हवा चली। बारिश के दौरान तिलहर क्षेत्र के गांव कलक्टरगंज में एक कच्चा मकान किर गया, जिसमें सो रहे ग्रामीण की मलवा के नीचे दबकर मौत हो गई। निगोही इलाके में बारिश के साथ तेज हवा से धान और गन्ने की फसलें धराशायी हो गईं। इससे किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
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कई दिनों से पड़ रही उमस भरी गर्मी के बाद सोमवार को मौसम का मिजाज कुछ बदला। सोमवार को सुबह से बादल छाए रहे। इससे शहरी क्षेत्र में बारिश तो नहीं हुई, लेकिन उमस भरी गर्मी बरकरार रही। हालांकि देहात के कई क्षेत्रों में हल्की बारिश हुई। जलालाबाद और पुवायां तहसील के कुछ गांवों मेें दिन मेें 11 बजे के बाद पहले बूंदाबांदी शुरू हुई और बाद में कुछ देर बारिश हुई।
निगोही इलाके के गांव चकबरैचा, शहतेपुर, पचदिउरा, रुहिला, बसारी, मूढ़ाकली, नौगवां, मिश्रीपुर, बैदापुर आदि गांवों में तड़के हवा के अंधड़ चले और सुबह चार बजे से बारिश होने लगी। तेज हवा में धान और गन्ना के पौधों की गीली जड़ें जमीन छोड़ने लगीं और फसलें खेतों में गिर गईं। वहीं निगोही के गांव बिक्रमपुर चकौरा निवासी ओमकार (55) अपनी बेटी जमुना देवी के घर तिलहर क्षेत्र के गांव चकबरैंचा के मजरा कलक्टरगंज में रहते थे। जमुना देवी के घर की दीवारें कच्ची होने के साथ छप्पर पड़ा था। रविवार की रात ओमकार समेत पूरा परिवार घर के बाहर पड़ी झोपड़ी में सोया था। सोमवार बारिश के साथ हवा के तेज झोंकों से जमुना देवी के घर की दीवार ढह गई। दीवार के मलबा और छप्पर के नीचे दबने से ओमकार की मौत हो गई। इसकी सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। हल्का के लेखपाल पंकज कुमार सक्सेना और कानूनगो सूरजपाल ने गांव जाकर नुकसान का आंकलन किया।
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बारिश से फायदा कम, हवा से नुकसान ज्यादा हुआ
निगोही। हवा के तेज झोंकों के साथ सोमवार को सुबह हुई बारिश से क्षेत्र के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में धान और गन्ने की फसलें धराशायी हो गईं। इससे संबंधित कृषकों की भारी क्षति होने का अनुमान है। गांव चकबरैचा, शहतेपुर, पचदिउरा, रुहिला, बसारी, मूढ़ाकली, नौगवां, मिश्रीपुर, बैदापुर आदि गांवों में तड़के हवा के अंधड़ चले और सुबह चार बजे से बारिश होने लगी। तेज हवा में धान और गन्ना के पौधों की गीली जड़ें जमीन छोड़ने लगीं और फसलें खेतों में गिर गईं।
दस एकड़ जमीन में कड़ी मेहनत करके और हजारों रुपये की लागत लगा कर गन्ने की फसल तैयार की, लेकिन सुबह तेज हवा के साथ हुई वर्षा से गन्ने की फसल गिर जाने से करीब एक लाख रुपये का नुकसान हो गया।
- अजीत सिंह, मिश्रीपुर (निगोही)
सात एकड़ जमीन पर गन्ना बड़ी मेहनत से तैयार किया और खाद, बीज के साथ कई बार सिंचाई पर रकम खर्च की, लेकिन बारिश के दौरान चली तेज हवा ने आधी फसल को गिराकर नुकसान कर दिया।
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- गौरव सिंह, बैदापुर (निगोही)
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