शाहजहांपुर। एसएस लॉ कॉलेज में समान नागरिक संहिता विषय पर युवा संसद का आयोजन किया गया। कुल 45 सदस्यों में सत्ता पक्ष के 12 व विपक्ष के 11 सदस्यों ने विधेयक पर अपने-अपने विचार रखे।
सत्ता पक्ष के नेता दिव्यांश गुप्ता ने कहा कि हम 21वीं सदी के भारत में रह रहे हैं, लेकिन आज भी देश में रहने वाले नागरिकों के लिए अलग-अलग कानून मौजूद हैं। विवाह, तलाक, दत्तक, संरक्षकता और संपत्ति जैसे महत्वपूर्ण सभी मुद्दे धर्म आधारित कानून से संचालित होते हैं।
एक ही देश में अलग-अलग धर्म के लिए अलग-अलग नियम एक भारत-श्रेष्ठ भारत के सपने से मेल नहीं खाता। नेता विपक्ष धीरेंद्र यादव ने कहा कि सत्ता पक्ष द्वारा प्रस्तुत समान नागरिक विधेयक नागरिकों के मौलिक अधिकारों खासकर संविधान में वर्णित अनुच्छेद 25 व अनुच्छेद 29 का उल्लंघन करता है। युवा संसद प्रतियोगिता के पीठासीन प्राधिकारियों में अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार गुप्ता, महासचिव सुभांश वाजपेयी, रिपोर्टर सौरभ सिंह, अभिषेक कुमार, सोमजीत सिंह, मार्शल अखंड प्रताप सिंह और विनीत कुमार शामिल रहे।
उत्कृष्ट वक्ता का पुरस्कार दिव्यांश गुप्ता, खुशबू वर्मा, रोहित कुमार एवं शुभी मिश्रा तथा विशिष्ट वक्ता का पुरस्कार अंशिका यादव, धीरेंद्र यादव, अमृत सिंह एवं मेहराज को प्रदान किया गया। विशिष्ट परिधान के लिए दीक्षा शर्मा को पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी चिन्मयानन्द ने की। मुख्य अतिथि डॉ. अवनीश मिश्रा, सचिव प्रबंध समिति, प्राचार्य डॉ. जयशंकर ओझा एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार शाह निर्णायक मंडल के रूप में मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन रूपल मिश्रा एवं संचालन प्रदीप कुमार सिंह और डॉ. दीप्ति गंगवार ने किया।
चिन्मयानंद ने कहा, आयोजित युवा संसद में छात्र सदस्यों द्वारा पक्ष और विपक्ष में दिए गए विचार न केवल छात्रों में व्यक्तित्व का निर्माण करेंगे, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए भावी विधायकों एवं सांसदों का भी निर्माण होगा।
मुख्य अतिथि डॉ. अवनीश मिश्रा ने कहा कि युवा संसद विधि छात्रों को संसदीय शैली की बहस, चर्चा और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल होने के लिए एक मंच प्रदान करती है।
डॉ. जयशंकर ओझा ने आभार व्यक्त करते हुए सदस्यों को खुले दिमाग से चर्चा करने और लोकतंत्र के सिद्धांतों का सम्मान करने के लिए प्रोत्साहित किया। डॉ. अमित कुमार यादव, प्रियंक कुमार वर्मा, डॉ. ज्योत्स्ना गुप्ता, डॉ. प्रेम सागर, अशोक कुमार, चंद्रशेखर मिश्र आदि का आयोजन में योगदान रहा।