चर्चा है कि करीब एक वर्ष पहले नगर निगम बोर्ड की बैठक के बाद 30 से 40 पार्षदों का एक गुट किसी स्थान पर एकत्र हुआ था। वायरल वीडियो में मेज पर रखे जल को गंगाजल कहते हुए पार्षद अपने हाथ में लेते हैं। इसके बाद एक पार्षद शपथ बोलता है जिसे अन्य दोहराते हैं।
पार्षद कहते हैं कि हम कसम खाकर कहते हैं कि जो भी निगम की आमदनी होगी, वो सभी 60 पार्षदों में बराबर से बंटेगी। हमारे ग्रुप के किसी पर भी आंच आती है तो सब इकट्ठे होंगे। इस दौरान कुछ पार्षदों की ओर से आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आ रही है। वीडियो कब और कहां बनाया गया, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
भाषा और इरादे पर उठे सवाल
निगम की कमाई बांटने को भ्रष्टाचार से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि जनप्रतिनिधियों का वीडियो में गालीगलौज करना उनके आचरण के विपरीत दिखाई दे रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद शहर में इसकी खूब चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान पार्षदों ने विकास और बेहतर सुविधाएं दिलाने का वादा कर जनता का विश्वास हासिल किया था। निर्वाचित होने के बाद उन्होंने कर्तव्य और निष्ठा की शपथ भी ली। ऐसे में वायरल वीडियो में निगम की कमाई में हिस्सा लेने की बात सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है।
महापौर बोलीं- जांच कराई जाएगी
महापौर अर्चना वर्मा ने कहा कि वायरल वीडियो में पार्षद क्या बोल रहे हैं, यह स्पष्ट नहीं है। हालांकि जो भी सुनाई दे रहा है, वह काफी निंदनीय है। मामले में वीडियो की जांच कराई जाएगी।