बाढ़ से घिरे ये गांव
गंगा की बाढ़ से तटीय गांव लुहारन नगला, बांसखेड़ा, भरतपुर, निबिया नगला, बटन नगला, मोती नगला,अभिचारपुर, कटेला नगला, पिड़रिया भी बाढ़ से घिर चुके हैं, लेकिन इन गांवों के लिए अभी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। पैलानी उत्तरी के फूल सिंह कुशवाहा ने बताया कि घर में पानी भर जाने से भोजन व्यवस्था में मुश्किलें आ रही हैं। इस्लामनगर के सालिम, मोहमद शहजाद, लालू, नन्हे आदि ने बताया कि गांव की गलियों में पानी भर जाने से लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतें आ रही। जरूरतमंद लोग निजी मोटर बोट का सहारा लेकर जरूरत का सामान लेने बाजार जा रहे हैं। अधिकारियों ने बाढ़ से घिरे किसी भी गांव में अभी तक मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था नहीं की है। इस कारण पशुपालक भी परेशान हैं।
ग्रामीणों की सूचना पर एसडीएम मधुसूदन गुप्ता ने गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और सिंचाई विभाग के अभियंताओं को तत्काल फौरी उपाय करने के निर्देश दिए। विधायक हरिप्रकाश वर्मा ने भी गांव पहुंचकर ग्रामीणों को सुरक्षा का भरोसा दिया।
ग्रामीणों के अनुसार रामगंगा की धारा भरतौली गांव से कुछ मीटर दूर रह गई है। वीरपाल, वीरेश सिंह, रामप्रकाश और कमलेश शर्मा ने बताया कि नदी कई मीटर भूमि काटते हुए गांव की ओर बढ़ रही है। भरतौली के पास रामपुर, रत्नापुर और वजीरपुर गांवों पर भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
किशनपाल, कौशल सिंह और इंद्रपाल ने कटान की जद में आने पर मकान तोड़ना शुरू कर दिए हैं। विधायक ने बताया कि नदी को पुराने स्थान पर लाने के लिए ड्रोन मैपिंग टीम गठित कराई गई है। रिपोर्ट के आधार पर नदी की धारा मोड़ने की परियोजना तैयार की जाएगी।