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तांडव: विधायक ने वीडियो किया जारी, बोले-आगे भी करेंगे कार्रवाई

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विधायक वीर विक्रम सिंह । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। मीरानपुर कटरा से भाजपा विधायक वीर विक्रम सिंह प्रिंस ने वेब सीरीज ‘तांडव’ के निर्माता-निर्देशक और दो अभिनेताओं पर रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें उन्होंने सोची समझी साजिश के तहत देवी-देवताओं का अपमान करने का आरोप निर्माता और सीरीज में काम करने वाले कलाकारों पर लगाया है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ती है तो आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
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भाजपा विधायक ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में कहा है कि ‘तांडव’ में करोड़ों हिन्दुओं के आस्था के केंद्र देवी-देवताओं का जिस तरह से उपहास किया गया है, वह सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का एक निंदनीय कृत्य है। किसी भी व्यक्ति को यह हरगिज अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह चंद रुपये कमाने के लालच में किसी भी धर्म के मानने वालों की आस्था से खिलवाड़ करे।
उन्होंने सूचना मंत्रालय को भी एक पत्र लिखा है जिससे कि इस प्रकार की बेलगाम वेब सीरीज को सेंसर बोर्ड के दायरे में लाया जा सके।
विधायक का आरोप है कि वेब सीरीज को षड्यंत्र पूर्वक बनाया गया है। उनका कहना है कि मनोरंजन के नाम पर घटिया सामग्री परोसने वालों के खिलाफ उनकी मुहिम आगे भी जारी रहेगी।
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यहां बता दें कि उन्होंने सोमवार को मीरानपुर कटरा थाने में समर्थकों के साथ पहुंचकर वेब सीरीज के निर्माता निर्देशक अली अब्बास जफर, अभिनेताओं सैफ अली खान और जीशान अयूब के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
वेब सीरीज के लिए भी सेंसर बोर्ड की जरूरत
शाहजहांपुर। तांडव वेब सीरीज पर मचे बवाल के बाद अब लोगों की प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। कुछ लोग इसे रचनात्मकता पर प्रतिबंध की तरह देखते हैं तो कुछ लोग वेब सीरीज के कंटेंट में नियामक स्थापित करने की जरूरत महसूस करते हैं। लोगों का कहना है कि बगैर धार्मिक आस्था का मजाक उड़ाए या अश्लील दृश्यों के भी अच्छी फिल्में या वेब सीरीज बनाईं जा सकती हैं।
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स्वतंत्रता असीमित नहीं हो सकती
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की एक सीमा होती है। हिन्दुस्तान में धार्मिक आस्था हमेशा से एक बड़ा विषय रही है। धार्मिक आस्था हो या राष्ट्रीय प्रतीक, ये देश को सांस्कृतिक और भौगोलिक तौर पर जोड़ने का काम करते हैं। इनसे खिलवाड़ करने से बचना चाहिए। किसी भी प्लेटफार्म के कंटेंट के परीक्षण के लिए एक नियामक संस्था का होना जरूरी है। -डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री, साहित्यकार
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सेंसरशिप जरूरी है
कलाकार होने के नाते अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं मगर आपकी स्वतंत्रता किसी के लिए परेशानी का सबब न बने। धार्मिक आस्था का मजाक उड़ाए बगैर भी अच्छी फिल्म या वेब सीरीज बनाई जा सकती है। सरकार को सेंसरशिप के लिए एक बॉडी का गठन करना चाहिए जो कंटेंट पर कंट्रोल करे। संविधान में स्वतंत्रता की सीमा स्पष्ट है।
-आलोक सक्सेना, रंगकर्मी
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बच्चों पर भी पड़ रहा गलत असर
मोबाइल हर उम्र के बच्चों के हाथ में होता है। इस तरह की वेब सीरीज में कभी अश्लील दृश्य परोसे जाते हैं तो कभी धार्मिक आस्था का मजाक उड़ाया जाता है। बेहतर होगा कि सरकार इस पर लगाम लगाए। पहले भी धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप किया जाता रहा है। किसी भी धर्म पर टिप्पणी करना सरासर गलत है।
-डॉ. नमिता सिंह, समाजसेवी।
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विशेष सावधानी जरूरी
धार्मिक मामलों में टीका-टिप्पणी से पहले निर्माता/निर्देशक को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। फिल्मी सितारों का लोग अनुसरण करते हैं, ऐसे में उन्हें सोच-समझकर काम करना चाहिए वरना लोगों की भावनाएं आहत होती हैं। सभी की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
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-योगेश श्रीकांत पांडेय, रंगकर्मी, फिल्म अभिनेता।
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