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दो कारों में लखनऊ गए थे जगेंद्र के परिजन

Tue, 23 Jun 2015 09:22 PM IST
पुवायां।
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जगेंद्र की मौत के बाद धरना प्रदर्शन कर रहे परिवार के लोगों ने रविवार रात साढ़े ग्यारह बजे ही फैसला कर लिया था कि अब धरना-प्रदर्शन समाप्त कर देना है। इसके बाद सुबह चार बजे खुटार के ही तीन लोगों के साथ जगेंद्र के पिता, पुत्र और एक रिश्तेदार लखनऊ रवाना हुए। यह सभी लोग दो गाड़ियों में सवार थे। रविवार रात 11 बजे परिवार के लोगों के साथ जगेंद्र के मित्र अवनीश मिश्रा ने बात की। इसके बाद ही परिवार के लोगों ने मामले में दिलचस्पी ले रहे एमएलसी जयेश प्रसाद के माध्यम से मुख्यमंत्री से मिलने का निर्णय लिया।
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साढ़े ग्यारह बजे जगेंद्र के परिवार ने जयेश प्रसाद को फोन पर लखनऊ चलने की सहमति दे दी। रात में पौने दो बजे जयेश प्रसाद ने परिवार के लोगों को फोन कर बताया कि मुख्यमंत्री से वार्ता हो गई है। मिलने का समय मिल गया है। वे लोग लखनऊ के लिए रवाना हो जाएं। सुबह चार बजे एक कार से अवनीश मिश्रा, सुमेर सिंह, राहुल, जगेंद्र के बड़े पुत्र का साला पुवायां के गांव जेगा निवासी गोविंद और खुटार में एक गन हाउस के स्वामी हरीशंकर अवस्थी घर से रवाना हुए। तय कार्यक्रम के तहत गोला रोड दोराहे पर खुटार के डॉ. प्रदीप शुक्ला अपनी कार और चालक के साथ मिले और दोनों कारें लखनऊ रवाना हो गईं। सोमवार सुबह 8.45 बजे सभी लोग लखनऊ में सहारा माल के सामने जयेश प्रसाद के आवास पर पहुंचे। दोपहर 2.10 बजे जयेश प्रसाद अपनी फार्चयूनर गाड़ी से रामू द्विवेदी के साथ और उनकी दूसरी स्कार्पियो गाड़ी से सुमेर सिंह सहित अन्य लोग मुख्यमंत्री आवास को रवाना हुए। यहां वरिष्ठ आईएएस नवनीत सहगल और कारागार मंत्री राजेंद्र चौधरी मिले और परिवार के लोगों से बात की। 2.30 बजे सभी लोगों की मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई और 3.50 तक वार्ता चली। इसके बाद दोनों एमएलसी सहित सभी लोग खाद्य और रसद मंत्री राजा भैया के आवास पर गए। राजा भैया ने भी जगेंद्र के पिता और पुत्र से मामले की जानकारी ली। बकौल जयेश, कुछ औपचारिकताएं शेष होने के कारण सभी लोगों को रात में लखनऊ ही रुकना पड़ा।

देवेंद्र पाल सिंह के बाद अब किसकी बारी
पुवायां। पूर्व विधायक देवेंद्र पाल सिंह का सपा से निष्कासन होने के बाद अब अगला नंबर किसका है? यह सवाल लोगों के जेहन में तैर रहा है। खुटार से गए लोगों ने भी मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को जिले के राजनीतिक हालात के बारे में जानकारी दी। सूत्र बताते हैं कि सपा नेतृत्व की शाहजहांपुर में चल रही गुटबाजी सहित अन्य गतिविधियों पर पूरी नजर है। सूत्रों ने बताया कि जगेंद्र सिंह के पिता और पुत्र के साथ लखनऊ गए लोगों में से दो लोगों ने मुख्यमंत्री को जिले के राजनीतिक हालात और सपा में चल रही गुटबाजी की पूरी जानकारी दी। बताया कि ऊपर से एकजुट नजर आने वाले कुछ नेता अंदर ही अंदर एक दूसरे की काट करते रहते हैं। जगेंद्र सिंह ने राज्यमंत्री के खिलाफ जो खबरें फेसबुक पर डाली थीं उसमें पूर्व विधायक देवेंद्रपाल सिंह का नाम सामने आया, लेकिन कुछ और लोग भी थे जो अंदर ही अंदर मामले को हवा देने में जुटे थे।
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मंगलवार को तैनात रहा भारी पुलिस फोर्स
खुटार। सोमवार को जगेंद्र के पिता सुमेर सिंह और पुत्र राहुल के लखनऊ जाने की जानकारी के बाद धरना स्थल पर पुलिस फोर्स कम संख्या में तैनात रहा था, लेकिन मंगलवार को एमएलसी सहित उच्च अधिकारियों और जगेंद्र के पिता-पुत्र के लखनऊ से लौटने की जानकारी के बाद धरना स्थल पर फोर्स को बढ़ा दिया गया। मौके पर कई थानों की फोर्स तैनात रही।

इस तरह हुआ जगेंद्र प्रकरण का पटाक्षेप
पुवायां। जगेंद्र सिंह की मृत्यु के बाद चल रहा हाई वोल्टेज ड्रामा समाप्त कराने और सरकार को संकट से निजात दिलाने के लिए जिले के कई सपा नेता सक्रिय थे। इनका मानना था कि मामले को निपटवाने से उनके नंबर सपा नेतृत्व की नजरों में बढ़ जाएंगे और इसका एमएलसी चुनाव सहित राजनैतिक फायदा मिलेगा, लेकिन बसपा एमएलसी जयेश प्रसाद ने भी सभी के अरमानों पर पानी फेरते हुए मामले को समाप्त कराकर अपनी राजनैतिक पकड़ साबित कर दी। जगेंद्र की मृत्यु के बाद से पूर्व सांसद मिथलेश कुमार, पुवायां की विधायक शकुंतला देवी ने प्रयास किया कि जगेंद्र के परिवार के लोग तैयार हो जाए और वह उन्हें मुख्यमंत्री से मिलवा दें। इसके लिए उन्होंने अपने खासमखास पुवायां नगर पालिका चेयरमैन संजय गुप्ता को लगाया। संजय गुप्ता खुटार नगर पंचायत चेयरमैन गुड्डी देवी के पति लक्ष्मण गुप्ता के साथ जगेंद्र के घर भी गए, लेकिन बात नहीं बनी। सपा के जिला स्तर के कई नेता मामले को नहीं निपटवा सके। इस दौरान उच्च स्तरीय फैसले के तहत एमएलसी जयेश प्रसाद ने मामले की कमान संभाली। जगेंद्र के परिवार के खास लोगों से बात की गई। पूर्व सांसद और विधायक से नाराज चल रहे खुटार के डॉ. प्रदीप शुक्ला को इस काम पर लगाया गया। प्रदीप शुक्ला और जगेंद्र के करीबी अवनीश मिश्रा के बीच वार्ता के बाद धीरे-धीरे सहायता राशि सहित अन्य मामलों में परिवार के लोगों से सहमति के बाद एमएलसी को जानकारी दी गई और और मुख्यमंत्री से हरी झंडी मिलने के बाद सरकार का संकट से निकालने का श्रेय एमएलसी जयेश प्रसाद के खाते में दर्ज हो गया।

ले लिया हार का बदला
पुवायां। पूर्व सांसद मिथलेश कुमार भी क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखते हैं, लेकिन कुछ माह पूर्व हुए भूमि विकास बैंक के चुनाव में उन्होंने डॉ. प्रदीप शुक्ला की मदद नहीं की थी।  इससे चुनाव मैदान में उतरी डॉ. प्रदीप शुक्ला की पत्नी को करारी हार का सामना करना पड़ा। चर्चा है कि डॉ. प्रदीप शुक्ला ने खुटार में अपने संबंधों का इस्तेमाल करते हुए पूर्व सांसद के धरना समाप्त कराने के प्रयासों में पलीता लगाने का काम किया और एमएलसी से बात कर मामले को शांत कराकर अपनी हार का बदला ले लिया।
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