फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक मार्च 1873 को शाहजहांपुर में पहली बार सुनाई दी थी छुक-छुक

विज्ञापन
विज्ञापन
शाहजहांपुर। करीब डेढ़ सौ साल पहले जिले में पहली बार ट्रेन की छुक-छुक सुनाई दी थी। एक मार्च 1873 को यहां पहली ट्रेन आई थी। मीटर गेज से शुरू हुआ रेल का सफर ट्राम (शहर के बीच से गुजरने वाली सिंगल पटरी) से होता हुआ ब्राडगेज तक पहुंच चुका है। ट्राम लाइन बिछाने के लिए यहां के सात लोगों ने चार लाख रुपये दिए थे।
विज्ञापन

16 अप्रैल 1853 को देश में पहली ट्रेन मुंबई से थाणे स्टेशन के बीच चली थी। इस ऐतिहासिक साल के 20 साल बाद शाहजहांपुर में पहली बार ट्रेन एक मार्च 1873 को आई थी। शाहजहांपुर में रेल के इतिहास पर एसएस कॉलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास खुराना का शोध पत्र का प्रकाशन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ह्यूमेनिटीज, कामर्स एवं साइंस में हुआ था। इस शोध पत्र के मुताबिक जिले में रेल का विकास तीन रूप में हुआ। एक अवध-रुहेलखंड कंपनी द्वारा बिछाई गई लखनऊ-सहारनपुर मुख्य लाइन और दूसरा कुमायूं-रुहेलखंड छोटी लाइन के रूप में हुआ। ये लाइनें मुख्य रूप सवे जिले के उत्तरी भाग में फैली हैं, लेकिन इसका प्रसार बीसलपुर होते हुए शाहजहांपुर तक था। तीसरा पुवायां लाइट रेल के रूप में ट्राम बनी, जो जिले के उत्तर से घने जंगलों से केरू फैक्ट्री तक लकड़ी लाती थी।
ब्रॉडगेज मुख्य लाइन एक मार्च 1873 को खोली गई। इसके बाद आठ सितंबर को यह फरीदपुर तक बढ़ाई गई। शाहजहांपुर में यह दक्षिण दिशा में कहेलिया तथा रोजा होते हुए प्रवेश करती है। इसकी एक शाखा मैसर्स केरू एंड कंपनी द्वारा बिछाई गई थी, जो रोजा जंक्शन से रोजा फैक्ट्री तक जाती है। साथ ही यह शहर के पश्चिम हिस्से की सीमा बनाती है। इसके दूसरी तरफ कैंट का इलाका है। उत्तर पश्चिम दिशा में यह लाइन बंथरा, तिलहर, कटरा होते हुए जिले को छोड़ देती है। बहगुल पुल की शाहजहांपुर कैंट से दूरी 35 मील है। शाहजहांपुर स्टेशन पर पहले दो शैड थे, और तिलहर में एक था। वर्तमान समय में शाहजहांपुर स्टेशन ए श्रेणी में आ गया है। लॉकडाउन से पहले यहां से होकर 200 से अधिक ट्रेनें गुजरती थीं, और 15,000 यात्री टिकट बिकते थे।
विज्ञापन

मीटरगेज लाइन का दूसरा विस्तार लखनऊ-सीतापुर-बरेली के बीच है। यह गोला से पीलीभीत तक चलती है। यह जिले के उत्तर पूर्व में बिछी और अप्रैल 1891 में खोली गई। यह जिले के खुटार परगना से गुजरती है। जहां उत्तरी सेहरामऊ तथा जोगराजपुरा दो स्टेशन हैं। हालांकि यह छोटी लाइन थी, लेकिन पुवायां परगने के लिए बहुत महत्वपूर्ण रही। करीबी जंगलों से लकड़ी की ढुलाई व चीनी एवं अन्य सामानों की पूर्ति में विशेष भूमिका निभाती थी। यह लाइन पुवायां लाइट रेल द्वारा अवध रुहेलखंड मुख्य लाइन से जुड़ती है। ट्राम-वे पुवायां स्ट्रीट ट्राम लाइन अप्रैल 1887 में बिछाई गई। इसके लिये शाहजहांपुर के सात नागरिकों ने चार लाख रुपये दिए। यह लाइन 17 जून 1890 को खोल दी गयी। 19 मई 1891 को इसका एक एक्सटेंशन खुटार खुला जबकि खुटार से मैलानी 22 दिसम्बर 1895 को खोला गया। इसके मध्यवर्ती स्टेशनों में कोरोकुइया, बड़ागांव, गंगसरा, गुटाइय्या घाट, खुटार थे। यह रेल 1914 तक चलती रही। बाद में प्रथम विश्वयुद्ध के समय यह लाइन उखाड़कर मेसोपोटामिया ले जाई गयी। वर्तमान में शाहजहांपुर में छोटी लाइन अमान परिवर्तन का काम बहुत तेजी चल रहा है। आने वाले समय में छोटी लाइन स्टेशन खत्म करके इसका जंक्शन बड़ी लाइन स्टेशन पर बनाये जाने की योजना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें