खुटार (शाहजहांपुर)। खुटार इलाके में नीलगाय को मारने के बाद बाघ गन्ने के खेत से निकलकर सरकारी नलकूप की ओर गया था। शुक्रवार को खेतों में बाघ के पगचिह्न मिले हैं। हालांकि वन अफसरों का कहना है कि पगचिह्न पुराने हैं। रेंजर ने दो टीमें बनाई हैं, जिन्हें बाघ की सूचना मिलने पर तत्काल मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। उधर, पुनौती गांव में लगाए गए कैमरों में बाघ की तस्वीर नहीं आई है।
खुटार इलाके में बुधवार रात बाघ रसवां कलां से पूर्व दिशा खेत में एक नीलगाय को मार डाला था। बृहस्पतिवार को डीएफओ आदर्श कुमार ने मौका मुआयना कर लोगों से बाघ के बारे में जानकारी ली थी। वनकर्मियों का मानना था कि बाघ रात में नीलगाय को खाने के लिए आ सकता है, इस कारण मृत नीलगाय को गड्ढा खोद कर जमीन में दबवा दिया।
किसानों ने बताया कि शुक्रवार को बाघ के पगचिह्न खुटार निवासी रामाधार मिश्रा के खेत में मिले हैं। बाघ ने जिस स्थान पर नीलगाय को मारा है, वहां से हिमंचलपुर के सरकारी नलकूप संख्या 17 के बीच में रामाधार का खेत है। किसानों का मानना है कि बाघ ने फिर से नलकूप के पास गन्ने के खेत में डेरा जमा लिया है। बाघ नलकूप के पास से ही नीलगाय का पीछा करते हुए आया होगा और खेत में नीलगाय को मार डाला होगा। इधर, शुक्रवार को ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम ने पगचिह्नों को जांच की।
सिंचाई और चारे के लिए खेतों पर जाना मजबूरी
खुटार। किसान राजीव कुमार, भज्जूलाल, महेंद्र कुमार, रामभरोसे आदि का कहना है कि वनकर्मी कह रहे हैं कि किसान खेतों पर जाने से बचें और जाना जरूरी हो तो समूह में जाएं। बारिश कम होने के कारण धान और गन्ने में सिंचाई बेहद जरूरी है। ऐसे में किसान खेत नहीं जाएगा तो फसल सूख जाएगी। इसके अलावा पशुओं के चारे का इंतजाम खेत जाए बिना नहीं हो सकता है। हर व्यक्ति का समूह में खेत जाना संभव नहीं है। वनकर्मियों को किसानों को सीख देने के स्थान पर बाघ को जंगल में खदेड़ने का प्रयास करना चाहिए।
पुनौती में कैमरों में कैद नहीं हुआ बाघ
खुटार। पुनौती गांव में ईट भट्ठे और जंगल के किनारे लगाए गए कैमरों में बाघ का एक भी तस्वीर कैद नहीं हुई है। लौहंगापुर में जंगल किनारे और ईंट भट्ठे पर बाघ देखे जाने के बाद वन विभाग ने कैमरे लगवाए थे। ईंट भट्ठे पर लगे कैमरे में हाईवे पर वाहनों की आवाजाही कैद हुई है। वहीं जंगल के किनारे लगे कैमरों में गाय, भैंस, बकरी चलाने जंगल पहुंचे चरवाहों और पशुओं की तस्वीरें आई हैं। अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है और जंगल में पशुओं को चराने जाने वालों को सख्ती से रोकने के निर्देश दिए हैं। बाघ की एक भी तस्वीर नहीं आने से वनकर्मियों को बाघ के मूवमेंट के बारे में कुछ पता नहीं चल सका है।
टीमें ग्रामीणों से बात कर करेंगी जागरूक
खुटार। बाघ की सूचना पर तत्काल वनकर्मियों के पहुंचने को लेकर रेंजर ने दो टीमों का गठन किया है। एक टीम लौहंगापुर और दूसरी टीम हिमंचलपुर क्षेत्र में रहेगी। लौहंगापुर में लगे कैमरों में बाघ की फोटो नहीं आने और बृहस्पतिवार से लेकर शुक्रवार तक बाघ की कोई सूचना नहीं मिलने पर लौहंगापुर की टीम को भी हिमंचलपुर भेजा गया है। वनकर्मी लोगों से बात करेंगे और उनको जागरूक करने के साथ ही बाघ की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर जांच करेंगे।
ईंट भट्ठे पर और जंगल किनारे लगे कैमरों में बाघ की फोटो नहीं आई हैं। कर्मचारियों से कहा गया है कि जंगल में लोगों को पशु लेकर न जाने दें। हिमंचलपुर में मिले बाघ के पगचिह्न पुराने हैं। वनकर्मी मौके पर मौजूद हैं।
- डीएस यादव, रेंजर खुटार